राहुल गांधी का आरोप : लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अमेरिका में गौतम अडानी के खिलाफ आरोप वापस लेने की खबर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़ी है। उन्होंने इसे “व्यापार समझौता नहीं, बल्कि एक सौदा” बताया।

पहले वाले बयान का हवाला : राहुल गांधी ने अपने पुराने “समझौतावादी प्रधानमंत्री” वाले बयान का जिक्र करते हुए X पर लिखा, “समझौतावादी प्रधानमंत्री ने कोई व्यापार समझौता नहीं किया, बल्कि अडानी की रिहाई के लिए सौदा किया।”
कांग्रेस का हमला : कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता “पूरी तरह से एकतरफा” है। रमेश ने लिखा कि यह वास्तव में अमेरिका द्वारा की गई एकतरफा लूट थी। उन्होंने इस समझौते को भारत की सैन्य नीति और ऑपरेशन सिंदूर से भी जोड़ा।
अमेरिकी रिपोर्ट का खुलासा : ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी न्याय विभाग और SEC अडानी समूह के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोपों को सुलझाने की तैयारी में हैं। यह 2024 में लगे आरोपों के लगभग 18 महीने बाद हो रहा है।
अडानी पर क्या थे आरोप : 2024 के अमेरिकी अभियोग में गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और अन्य पर भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देकर अरबों डॉलर के सौर ऊर्जा अनुबंध हासिल करने का आरोप था। आरोपों में 250 मिलियन डॉलर से अधिक रिश्वत और निवेशकों को गुमराह करने का भी जिक्र था। अडानी समूह ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया था।
SEC मुकदमे का निपटारा : रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, SEC ने अडानी के खिलाफ दीवानी मुकदमे का निपटारा कर लिया है, जो अदालत की मंजूरी के अधीन है।
ट्रंप के वकील की भूमिका : न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया कि अडानी ने ट्रंप के निजी वकील रॉबर्ट जे गिफ्रा जूनियर की टीम को नियुक्त किया। गिफ्रा ने न्याय विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की। अडानी पक्ष ने 10 अरब डॉलर निवेश और 15,000 नौकरियों का प्रस्ताव रखा, हालांकि अभियोजकों ने कहा कि निवेश का मामले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया : यह घटनाक्रम कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक खींचतान को और तेज कर रहा है। राहुल गांधी और जयराम रमेश ने इसे मोदी सरकार की छवि पर सवालिया निशान बताया।