राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jaipur International Airport) पर बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया और प्रशासनिक महकमे में अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब जर्मनी के फ्रैंकफर्ट से राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली आ रही एअर इंडिया की एक अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ान से अचानक हाइजैक (विमान अपहरण) का अलार्म सिग्नल प्राप्त हुआ। विमान से हाईजैक कोड ट्रांसमिट होते ही भारतीय उड्डयन सुरक्षा एजेंसियों, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के उच्च अधिकारियों के बीच सनसनी फैल गई। स्थिति की गंभीरता और सुरक्षा संवेदनशीलता को देखते हुए एअर इंडिया के इस विमान को तुरंत दिल्ली के बजाय नजदीकी जयपुर एयरपोर्ट की ओर डायवर्ट किया गया और वहां आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित लैंडिंग (Emergency Landing) कराई गई।
प्राप्त आधिकारिक जानकारी और शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, एअर इंडिया की उड़ान संख्या AI2030 फ्रैंकफर्ट से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए अपनी निर्धारित उड़ान पर थी। जब यह विमान भारतीय वायुसीमा में दिल्ली के पास पहुंचने वाला था, तभी अचानक विमान के कॉकपिट से ‘स्क्वाक कोड 7500’ (Squawk Code 7500) का सिग्नल एटीसी (Air Traffic Control) के रडार पर फ्लैश होने लगा। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन मानकों और नियमों के अनुसार, ट्रांसपोंडर द्वारा 7500 कोड का इस्तेमाल केवल उसी स्थिति में किया जाता है जब विमान को अवैध रूप से कब्जे में लिया गया हो यानी हाइजैक (Hijack) कर लिया गया हो। जैसे ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल को यह खतरनाक सिग्नल मिला, पूरे देश के उड्डयन सुरक्षा तंत्र को तत्काल ‘हाई अलर्ट’ (High Alert) पर डाल दिया गया।
आइसोलेशन बे में भेजा गया विमान, सुरक्षा एजेंसियों ने संभाला मोर्चा
जयपुर एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग की सूचना मिलते ही केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), राजस्थान पुलिस, एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS), बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad), और खुफिया एजेंसियों की टीमों ने तुरंत पूरे हवाई अड्डे परिसर को अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया। जयपुर हवाई अड्डे पर लैंडिंग के तुरंत बाद विमान को मुख्य रनवे और टर्मिनल बिल्डिंग से काफी दूर एक विशेष रूप से निर्धारित सुरक्षित स्थान यानी ‘आइसोलेशन बे’ (Isolation Bay) में ले जाया गया।
- यात्रियों और क्रू की स्थिति: इस अंतरराष्ट्रीय उड़ान में कुल 293 सम्मानित यात्री और 13 क्रू मेंबर्स (विमान दल के सदस्य) सवार थे। लैंडिंग के तुरंत बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया और लाउंज में पहुंचाया गया, जहां सुरक्षा अधिकारियों द्वारा उनकी स्थिति का जायजा लिया गया।
- गहन तलाशी और सुरक्षा जांच: आइसोलेशन बे में खड़े विमान, यात्रियों के सामान (Luggage) और कार्गो की स्निफर डॉग्स और आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की मदद से बारीकी से जांच की गई। सुरक्षा बल के जवानों ने पूरे कॉकपिट और पैसेंजर केबिन की एक-एक सीट की तलाशी ली ताकि किसी भी तरह के संभावित खतरे की आशंका को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
पायलट की मानवीय भूल या तकनीकी गड़बड़ी? सुरक्षा एजेंसियों ने दिया ‘फॉल्स अलार्म’ का कड़ा संदेश
घंटों चले व्यापक और गहन सुरक्षा जांच अभियान (Security Screening) के बाद अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों ने राहत की सांस ली, जब यह स्पष्ट हुआ कि विमान के भीतर कोई अपहरणकर्ता या संदिग्ध व्यक्ति मौजूद नहीं था और यह पूरा मामला एक ‘फॉल्स अलार्म’ (False Alarm) या गलत सिग्नल का था। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि पायलट से कॉकपिट में ट्रांसपोंडर कोड सेट करते समय गलती से या किसी तकनीकी खराबी (Technical Snag) के कारण 7500 कोड डायल हो गया था, जिससे एटीसी को हाइजैक का अलर्ट चला गया।
एअर इंडिया के आधिकारिक प्रवक्ता ने इस पूरे घटनाक्रम पर बयान जारी करते हुए कहा कि फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट में एक अनपेक्षित तकनीकी/प्रशासनिक सिग्नल के चलते एहतियातन जयपुर में लैंडिंग कराई गई थी। एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि विमान में सवार सभी 293 यात्री और 13 क्रू मेंबर्स पूरी तरह से सुरक्षित हैं। आवश्यक सुरक्षा क्लीयरेंस और सिविल एविएशन अथॉरिटी (DGCA) की औपचारिक अनुमति मिलने के बाद विमान को पुनः दिल्ली के लिए रवाना करने के उचित प्रबंध किए गए। हालांकि, कुछ देर के लिए बने डर और दहशत के माहौल के बाद मामला शांत होने से सभी ने राहत की सांस ली।