भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पार्टी के सांसद राहुल गांधी पर एक बार फिर बेहद आक्रामक, तीखा और चौतरफा हमला बोला है। देश की राजधानी दिल्ली में विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों और विभिन्न राजनीतिक गतिविधियों के बीच स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी के राजनीतिक वजूद, उनकी कार्यशैली और चुनावी इतिहास पर करारा कटाक्ष किया है। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के अमेठी संसदीय क्षेत्र की राजनीतिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने दम पर पारंपरिक सीट पर भी अकेले चुनाव लड़ने का साहस नहीं जुटा सका, वह आज देश की राजधानी में पहुंचकर अपने आपको ‘शहंशाह’ या सर्वेसर्वा साबित करने का ख्वाब देख रहा है।
स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी द्वारा दिल्ली में ‘इंडिया’ गठबंधन के विभिन्न दलों के साथ मिलकर चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलनों और प्रदर्शनों पर भी कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि चुनावी पराजय और अपनी राजनीतिक जमीन लगातार खिसकती देख अब कांग्रेस नेतृत्व हताशा के दौर से गुजर रहा है और इसी बौखलाहट में संवैधानिक संस्थाओं को डराने, धमकाने तथा उन पर अनावश्यक दबाव बनाने का कुचक्र रचा जा रहा है, जिसे देश की जागरूक जनता भली-भांति समझ चुकी है।
अमेठी की जनता और चुनाव मैदान से दूरी पर कसा तंज
अपने तीखे और बेबाक तेवरों के लिए देश भर में पहचानी जाने वाली भाजपा नेत्री स्मृति ईरानी ने तंज कसते हुए कहा कि गांधी परिवार और विशेषकर राहुल गांधी ने हमेशा से अमेठी की भोली-भाली और विकास की आस लगाए बैठी जनता का केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया है, लेकिन धरातल पर वहां की जनता को सिवाय निराशा और पिछड़ेपन के कुछ नहीं मिला। उन्होंने मुखर होकर कहा कि जो नेता खुद अपनी पुरानी और सुरक्षित समझी जाने वाली सीट पर अकेले चुनाव लड़ने का साहस नहीं कर पाया और मैदान छोड़कर दूसरी सुरक्षित जगहों की तलाश में निकल गया, वह आज पूरे देश की राजनीति को प्रभावित करने और खुद को विपक्ष का सर्वेसर्वा दिखाने का असफल प्रयास कर रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि देश की जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से ऐसे अवसरवादी और जमीन से कटे हुए नेताओं को पूरी तरह से नकार दिया है, जो जनता के वास्तविक मुद्दों पर काम करने के बजाय केवल मीडिया की सुर्खियों में बने रहने, बयानबाजी करने और जनता के बीच भ्रम फैलाने की राजनीति में ही अपनी आस्था रखते हैं।
संवैधानिक संस्थाओं पर हमलों को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों को घेरा
विपक्ष द्वारा लगातार देश के निर्वाचन आयोग, चुनाव आयुक्तों और अन्य स्वतंत्र संस्थाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों और विरोध प्रदर्शनों पर बोलते हुए भाजपा की राष्ट्रीय नेत्री ने कहा कि जब-जब कांग्रेस पार्टी या उसके सहयोगियों को चुनावों में पराजय का मुंह देखना पड़ता है या उन्हें जनता का अपेक्षित समर्थन प्राप्त नहीं होता है, तब-तब वे देश की स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाओं, न्यायपालिका और चुनाव आयोग की गरिमा को ठेس पहुंचाने और उन्हें कलंकित करने का कोई अवसर नहीं छोड़ते हैं। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र की स्वस्थ परंपराओं के लिए एक बेहद खतरनाक, गैर-जिम्मेदाराना और अवांछनीय रवैया करार दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली में विपक्ष का यह तथाकथित विरोध प्रदर्शन किसी जनहित या आम आदमी के कल्याण का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह चुनावों में लगातार और बार-बार मिल रही करारी हार के बाद उपजी गहरी राजनीतिक हताशा का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा कि देश की समझदार और परिपक्व जनता विपक्ष के इस दोहरे चरित्र, अवसरवादी राजनीति और राजनीतिक ड्रामे को अच्छी तरह से जानती और समझती है, और आने वाले समय में जनता ऐसे दलों को और अधिक मजबूती से लोकतांत्रिक माध्यमों से सबक सिखाएगी।