भारत सरकार पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट को लेकर बेहद सतर्क है।
विदेश मंत्रालय ने अगले हफ्ते होने वाली Heads of Mission कॉन्फ्रेंस में हॉर्मुज समुद्री मार्ग ब्लॉकेड के मुद्दे को प्रमुखता से शामिल किया है। ईरान-अमेरिका तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, जिससे भारत की तेल आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है।
मुख्य बातें:
- हॉर्मुज समुद्री मार्ग ब्लॉकेड पर अगले हफ्ते Heads of Mission कॉन्फ्रेंस में चर्चा
- विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे को उच्च प्राथमिकता दी
- भारत की तेल सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर फोकस
- सभी राजदूतों और उच्चायुक्तों को इस पर रणनीति बनाने के निर्देश
क्यों महत्वपूर्ण है यह चर्चा? हॉर्मुज समुद्री मार्ग से दुनिया का करीब 20% तेल निर्यात होता है। ईरान-अमेरिका युद्ध की आशंका और ब्लॉकेड की स्थिति में भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश को भारी नुकसान हो सकता है। सरकार अब सभी राजनयिक मिशनों से फीडबैक लेकर वैकल्पिक रणनीति तैयार कर रही है।
सरकार की तैयारी विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, कॉन्फ्रेंस में हॉर्मुज संकट के अलावा क्षेत्रीय सुरक्षा, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और वैकल्पिक तेल आयात मार्गों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। भारत पहले से ही सऊदी अरब, UAE और अन्य देशों से अतिरिक्त तेल खरीदने की तैयारी कर रहा है।
वैश्विक संदर्भ यह कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हो रही है जब हॉर्मुज समुद्री मार्ग पर तनाव चरम पर है। अमेरिका और इजरायल ईरान पर दबाव बढ़ा रहे हैं, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।