पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सर्वोच्च नेता ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए उनके तत्काल त्यागपत्र की मांग की है। ‘सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) और युवा छात्र संगठनों द्वारा निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में किए जा रहे देशव्यापी आंदोलन का खुलकर समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश का युवा वर्ग लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरा है और वे पूरी दृढ़ता के साथ इस युवा पीढ़ी के आंदोलन के पीछे खड़ी हैं।
कोलकाता में संवाददाताओं से वार्ता करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न चिह्न खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कार्यकाल में निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के स्थान पर केंद्र सरकार की एक राजनीतिक इकाई की भांति कार्य कर रहा है। ममता बनर्जी ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को सुनिश्चित करने में विफल रहने और विपक्षी दलों की न्यायसंगत शिकायतों को निरंतर अनदेखा करने के कारण ज्ञानेश कुमार को नैतिकता के आधार पर अपने पद पर बने रहने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है।
मुख्यमंत्री ने सीजेपी और संबद्ध छात्र-युवा संगठनों के विरोध प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि देश का युवा वर्ग अब जागृत हो चुका है और वह मताधिकार एवं लोकतांत्रिक संरचना के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ सहन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से मतदाता सूचियों में अनियमितताएं, वोटर लिस्ट से नामों को हटाने का षड्यंत्र और चुनाव तिथियों के निर्धारण में पक्षपात देखने को मिल रहा है, उससे चुनाव आयोग की साख को गहरा धक्का पहुंचा है। देश की युवा शक्ति द्वारा उठाया गया यह कदम भारतीय लोकतंत्र के भविष्य के लिए अत्यंत निर्णायक सिद्ध होगा।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ-साथ अब संवैधानिक संस्थाओं का भी राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने संसद से लेकर सड़कों तक इस मुद्दे को प्रखरता से उठाने की घोषणा करते हुए कहा कि यदि निर्वाचन आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने पद त्याग नहीं किया, तो यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप धारण करेगा। ममता बनर्जी ने देश के अन्य विपक्षी दलों से भी इस लोकतांत्रिक संघर्ष में एकजुट होने का आह्वान किया।
ममता बनर्जी के इस तीखे प्रहार के उपरांत राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हलचल तीव्र हो गई है। एक ओर जहाँ सत्तारूढ़ दल ने मुख्यमंत्री के वक्तव्य को संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को धूमिल करने वाला और निराशाजनक करार दिया है, वहीं दूसरी ओर सीजेपी और युवा प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के समर्थन का स्वागत करते हुए अपने विरोध प्रदर्शन को और तेज करने का संकल्प दोहराया है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल सहित संपूर्ण देश में निर्वाचन आयोग की भूमिका और निष्पक्षता पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।