गुजरात की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री एवं दिग्गज राजनेता शंकरसिंह वाघेला की संभावित ‘घर वापसी’ को लेकर राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तीव्र हो गई है। वर्ष 2017 में कांग्रेस से त्यागपत्र देने वाले 86 वर्षीय वाघेला लगभग नौ वर्षों के अंतराल के पश्चात् पुनः पार्टी का दामन थामने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, गुजरात कांग्रेस के शीर्ष नेताओं और एआईसीसी प्रभारियों के साथ वाघेला की प्राथमिक वार्ता संपन्न हो चुकी है तथा अब केवल कांग्रेस आलाकमान (हाईकमान) की हरी झंडी और राहुल गांधी से अंतिम औपचारिक मुलाकात की प्रतीक्षा की जा रही है।
वाघेला के कांग्रेस में पुनरागमन के प्रयास ऐसे समय में सामने आए हैं जब राज्य में आगामी गांधीनगर नगर निगम चुनाव और तत्पश्चात वर्ष 2027 के गुजरात विधानसभा चुनाव की तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं। 1990 के दशक में भारतीय जनता पार्टी से अलग होकर ‘राष्ट्रीय जनता पार्टी’ (RJP) का गठन करने वाले वाघेला बाद में अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर चुके थे। वे वर्ष 1996 में कांग्रेस के समर्थन से गुजरात के मुख्यमंत्री बने और तत्पश्चात मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय वस्त्र मंत्री तथा गुजरात विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभा चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि वाघेला ने वर्ष 2017 में राज्यसभा चुनाव और राष्ट्रपति चुनाव के दौरान कांग्रेस आलाकमान से मतभेदों के चलते अपने समर्थकों सहित पार्टी छोड़ दी थी। इसके बाद उन्होंने ‘जनविकल्प मोर्चा’ का गठन किया तथा कालान्तर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और ‘प्रजा शक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी’ (PSDP) से भी जुड़े रहे, किंतु वे कोई बड़ी चुनावी सफलता प्राप्त नहीं कर सके। वाघेला ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है कि उनकी आयु को देखते हुए उन्हें पार्टी से किसी पद या लाभ की आकांक्षा नहीं है, अपितु वे भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध विपक्षी ताकतों को एकजुट करने में अपना अनुभव समर्पित करना चाहते हैं।
गुजरात कांग्रेस नेतृत्व में वाघेला के प्रवेश को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं दृष्टिगोचर हो रही हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा और वरिष्ठ नेता भरतसिंह सोलंकी का मानना है कि भाजपा को पराजित करने हेतु सभी समान विचारधारा वाले वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का उपयोग किया जाना चाहिए। भरतसिंह सोलंकी ने स्वीकार किया है कि वे बीते डेढ़ वर्ष से वाघेला को पुनः जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। हालाँकि, पार्टी के एक वर्ग में 2017 की घटनाओं के दृष्टिगत उनकी निष्ठा को लेकर अब भी संशय बना हुआ है।
वर्तमान में 182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा में मात्र 12 सीटों पर सिमटी कांग्रेस के लिए वाघेला का पारंपरिक क्षत्रिय-ठाकोर जनाधार संजीवनी सिद्ध हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस आलाकमान इस ‘घर वापसी’ को स्वीकृति प्रदान करता है, तो उत्तर और मध्य गुजरात के क्षेत्रों में पार्टी के संगठन को एक नया ढांचागत संबल प्राप्त होगा। बहरहाल, दिल्ली से अंतिम निर्णय की घोषणा के उपरांत ही इस बहुचर्चित राजनीतिक घटनाक्रम का भविष्य स्पष्ट हो सकेगा।