उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को जिन इलाकों में नुकसान हुआ था, अब वहां जमीनी स्तर पर वापसी की रणनीति तैयार की जा रही है। बीजेपी ने ऐसे करीब 18,900 बूथों की पहचान की है, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को बढ़त मिली थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में उसका प्रदर्शन कमजोर पड़ गया।
बीजेपी का यह अभियान बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों के बजाय बूथ स्तर पर ध्यान केंद्रित करने वाला है। पार्टी हर कमजोर बूथ का अलग-अलग विश्लेषण कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वहां उसका समर्थन क्यों कम हुआ और किन सामाजिक समूहों या स्थानीय मुद्दों की वजह से मतदाताओं का रुख बदला।
करीब 80 फीसदी कमजोर बूथ ग्रामीण इलाकों में
बीजेपी की आंतरिक समीक्षा में सामने आया है कि चिन्हित 18,900 बूथों में से करीब 80 फीसदी बूथ ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। इनमें छोटे गांवों और बिखरी हुई आबादी वाले इलाके बड़ी संख्या में शामिल हैं। इसके मुकाबले लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर जैसे बड़े शहरी केंद्रों में पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षाकृत मजबूत रहा।
यही वजह है कि बीजेपी के रिकवरी प्लान में ग्रामीण मतदाताओं के साथ दोबारा संपर्क स्थापित करना सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी यह समझने की कोशिश कर रही है कि किन समुदायों में उसका समर्थन कम हुआ और स्थानीय स्तर पर कौन से मुद्दे चुनावी नतीजों को प्रभावित कर रहे हैं।
बूथ की रिपोर्ट से तैयार होगी आगे की रणनीति
बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कमजोर प्रदर्शन वाले विधानसभा क्षेत्रों के एक-एक बूथ की रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसमें पिछले चुनावों के आंकड़ों के साथ स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों का भी अध्ययन किया जा रहा है।
पार्टी की रणनीति केवल यह पता लगाने तक सीमित नहीं है कि कौन सा बूथ हारा, बल्कि यह समझने पर भी जोर है कि वहां हार की वजह क्या रही। इसके बाद स्थानीय संगठन को मजबूत करने और मतदाताओं के बीच दोबारा संपर्क बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।
अवध और पूर्वांचल पर खास नजर
बीजेपी के लिए अवध और पूर्वांचल के कई इलाके विशेष चुनौती बने हुए हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में इन क्षेत्रों के कई हिस्सों में पार्टी का समर्थन आधार कमजोर हुआ था। अब संगठन इन क्षेत्रों में बूथ स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
पार्टी की रणनीति में गैर-यादव अन्य पिछड़ा वर्ग और गैर-जाटव दलित मतदाताओं के बीच अपना समर्थन मजबूत करना भी अहम माना जा रहा है। बसपा के कमजोर होने के बाद विपक्षी मतों के समीकरण में आए बदलाव का भी बीजेपी अध्ययन कर रही है।
विनोद तावड़े करेंगे बूथ स्तर की समीक्षा
उत्तर प्रदेश बीजेपी के प्रभारी विनोद तावड़े 16 से 22 सितंबर के बीच एक बार फिर उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे। इस दौरान पार्टी संगठन की तैयारियों और कमजोर बूथों पर किए जा रहे काम की समीक्षा की जाएगी।
बीजेपी के लिए यह पूरी कवायद आंकड़ों से लेकर जमीन तक पहुंचने की रणनीति है। पहले कमजोर बूथों की पहचान, फिर वहां हुए राजनीतिक और सामाजिक बदलाव का अध्ययन और उसके बाद स्थानीय संगठन के जरिए मतदाताओं के बीच दोबारा पहुंच बनाने की कोशिश की जाएगी।
2024 के लोकसभा चुनाव ने बढ़ाई चुनौती
2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी को बड़ा झटका लगा था। पार्टी की लोकसभा सीटों की संख्या 2019 में 62 से घटकर 2024 में 33 रह गई। वहीं समाजवादी पार्टी ने 2024 में 37 सीटें जीतीं, जबकि 2019 में उसके खाते में केवल पांच सीटें थीं।
अब बीजेपी 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए 2024 के नतीजों का बूथ स्तर तक विश्लेषण कर रही है। पार्टी का मानना है कि विधानसभा चुनाव में पूरे राज्य के औसत आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण प्रत्येक बूथ पर संगठन की ताकत और मतदाताओं के बीच संपर्क होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी चुनाव से पहले प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार दौरे कर रहे हैं। हाल के महीनों में उन्होंने कई जिलों में विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया है। बीजेपी इन कार्यक्रमों के जरिए सरकार के कामकाज को जनता तक पहुंचाने के साथ-साथ उन इलाकों में भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जहां 2024 में विपक्ष को बढ़त मिली थी।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी का 18,900 बूथों वाला यह रिकवरी प्लान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी अब 2024 के नुकसान को केवल सीटों के स्तर पर नहीं, बल्कि बूथ-दर-बूथ समझने और सुधारने की कोशिश कर रही है। आने वाले महीनों में इन बूथों पर संगठन की सक्रियता और मतदाताओं के बीच संपर्क अभियान बीजेपी की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन सकता है।