उत्तर प्रदेश के मथुरा में खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। कोसीकलां इलाके में अधिकारियों ने एक बोलेरो वाहन से करीब 1000 किलो संदिग्ध पनीर बरामद किया। पनीर की गुणवत्ता पर संदेह होने के बाद अधिकारियों ने उसके नमूने जांच के लिए लिए और पूरे माल को जनहित में नष्ट करा दिया। विभाग के मुताबिक, नष्ट किए गए पनीर की अनुमानित कीमत करीब 22 लाख रुपये है।
खाद्य विभाग की टीम कोसीकलां क्षेत्र के नंदगांव रोड पर जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान टीम ने एक बोलेरो गाड़ी को रोककर उसकी जांच की। वाहन में बड़ी मात्रा में पनीर लदा हुआ मिला। पूछताछ और जांच के दौरान सामने आया कि यह पनीर राजस्थान के कामां क्षेत्र में स्थित एक डेयरी से मथुरा लाया जा रहा था। इसे यहां बिक्री के लिए पहुंचाया जाना था।
वाहन में मिले पनीर की गुणवत्ता को लेकर अधिकारियों को संदेह हुआ। इसके बाद खाद्य विभाग ने पनीर के दो नमूने लिए और उन्हें जांच के लिए भेज दिया। अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में मिले पनीर को संदिग्ध और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानते हुए आगे की कार्रवाई की।
नमूने लेने के बाद करीब 1000 किलो पनीर मौके पर ही नष्ट करा दिया गया। विभाग के अनुसार, बरामद और नष्ट किए गए पनीर की अनुमानित कीमत करीब 22 लाख रुपये थी। इतनी बड़ी मात्रा में संदिग्ध पनीर पकड़े जाने के बाद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनकी आपूर्ति व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब मथुरा में मिलावटी और संदिग्ध खाद्य पदार्थों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, यह एक महीने के भीतर पनीर के खिलाफ तीसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले भी जिले में बड़ी मात्रा में संदिग्ध या मिलावटी पनीर के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।
त्योहारों के दौरान दूध और उससे बने उत्पादों की मांग बढ़ने के बीच खाद्य विभाग की ओर से बाजार और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। इस कार्रवाई का उद्देश्य संदिग्ध खाद्य सामग्री को बाजार तक पहुंचने से रोकना और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पनीर के लिए गए दोनों नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद उसकी गुणवत्ता को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।