केरल की राजनीति में एक बड़ा प्रशासनिक एवं राजनीतिक भूचाल आ गया है। राज्य सरकार ने कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) से जुड़े बहुचर्चित कथित वित्तीय अनियमितता मामले में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनके परिवार के सदस्यों के विरुद्ध औपचारिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) द्वारा इस संबंध में विस्तृत जांच शुरू की जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इस अप्रत्याशित फैसले के पश्चात भारी हलचल देखने को मिल रही है और विपक्षी दलों द्वारा सरकार के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की जा रही हैं।
यह संपूर्ण विवाद प्राइवेट मिनरल कंपनी सीएमआरएल द्वारा राजनेताओं और उनके परिजनों को कथित रूप से किए गए संदिग्ध भुगतानों से संबंधित है। पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की पुत्री वीणा टी. की आईटी कंपनी पर भी बिना कोई सेवा प्रदान किए इस मिनरल फर्म से बड़ी धनराशि प्राप्त करने के गंभीर आरोप लगे थे। इससे पूर्व गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) और अन्य केंद्रीय एजेंसियों द्वारा भी इस मामले के विभिन्न वित्तीय पहलुओं की जांच की जा रही थी। अब राज्य सरकार के इस नए निर्देश के पश्चात स्थानीय सतर्कता ब्यूरो भी इस पूरे घटनाक्रम और लेनदेन की आधिकारिक पड़ताल करेगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सतर्कता विभाग इस बात की गहनता से जांच करेगा कि क्या निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने के बदले में किसी प्रकार का अवैध वित्तीय लेन-देन अथवा पद का दुरुपयोग किया गया था। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री के साथ-साथ उनके परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका को भी जांच के दायरे में लाया गया है। सरकार के इस कदम को भ्रष्टाचार के विरुद्ध शून्य सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस) की नीति के रूप में देखा जा रहा है। जांच एजेंसी द्वारा जल्द ही संबंधित पक्षों को पूछताछ के लिए समन जारी किए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनकी पार्टी (सीपीआई-एम) ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई कार्रवाई करार दिया है। उनका कहना है कि यह सभी वित्तीय लेनदेन पूरी तरह से वैध व्यावसायिक समझौतों के अंतर्गत किए गए थे और इनमें किसी प्रकार का भ्रष्टाचार नहीं हुआ है। दूसरी ओर, विपक्षी भारतीय जनता पार्टी और अन्य राजनीतिक दलों ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। राज्य के इस हाई-प्रोफाइल मामले में जांच के आदेश मिलने के पश्चात केरल की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है।