केरल इन दिनों गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है। पिछले करीब दो सप्ताह से राज्य के कई हिस्सों में शाम और रात के समय बिजली कटौती की जा रही है। मांग में तेज बढ़ोतरी, कमजोर मानसून के कारण जलविद्युत उत्पादन पर असर और पहले रद्द किए गए दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
बिजली की मांग में तेज बढ़ोतरी
केरल में सितंबर के दौरान बिजली की मांग पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 925 मेगावाट बढ़ी है। राज्य की मौजूदा बिजली जरूरत लगभग 5,000 से 6,000 मेगावाट के बीच है। अधिकारियों के मुताबिक घरों में बिजली की बढ़ती खपत के साथ उद्योगों के विस्तार से आने वाले वर्षों में मांग और बढ़ने की संभावना है।
कमजोर मानसून से उत्पादन पर असर
केरल की बिजली व्यवस्था में जलविद्युत की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस साल बारिश कमजोर रहने से जलाशयों और जलविद्युत उत्पादन पर असर पड़ा है। दूसरी ओर, राज्य में सौर ऊर्जा का उत्पादन बढ़ा है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा दिन के समय उपलब्ध होता है। पर्याप्त बैटरी या अन्य भंडारण व्यवस्था नहीं होने के कारण शाम और रात की अधिक मांग के समय इस बिजली का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
बिजली खरीद समझौते रद्द होने का मुद्दा
मौजूदा संकट में पुराने बिजली खरीद समझौतों का मुद्दा भी सामने आया है। बिजली मंत्री सनी जोसेफ के अनुसार, 465 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए करीब 4.29 रुपये प्रति यूनिट की दर वाला 25 साल का समझौता पहले रद्द हो गया था। सरकार अब इस समझौते को दोबारा स्थापित कराने के लिए कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर प्रयास कर रही है।
हालांकि, इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं। सरकार की ओर से समझौते के रद्द होने को मौजूदा संकट का एक कारण बताया गया है, जबकि इस पूरे मामले को लेकर पिछली सरकारों और संबंधित फैसलों पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
रात में बिजली कटौती से बढ़ी परेशानी
बिजली की कमी के चलते केरल राज्य विद्युत बोर्ड यानी केएसईबी को शाम और रात के समय 15 से 30 मिनट तक की बिजली कटौती लागू करनी पड़ी है। इसका असर घरों के अलावा अस्पतालों और वृद्धाश्रमों जैसे संस्थानों पर भी पड़ा है। खासकर बच्चों और बीमार लोगों वाले परिवारों को इन कटौतियों के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बाहर से बिजली खरीदने पर बढ़ रही निर्भरता
केरल अपनी कुल बिजली जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों और बाहरी स्रोतों से पूरा करता है। राज्य में घरेलू उत्पादन कुल मांग का करीब एक-चौथाई ही है। बिजली की उपलब्धता कम होने के कारण अब सरकार कई राज्यों और बिजली उत्पादक कंपनियों से अतिरिक्त बिजली खरीदने के लिए बातचीत कर रही है।
सरकार ने बताया है कि आठ राज्यों से संपर्क किया गया है और अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा निगम से भी 150 मेगावाट बिजली 4.65 रुपये प्रति यूनिट की दर से लेने की व्यवस्था की गई है। सरकार का कहना है कि मौजूदा संकट को करीब एक सप्ताह में नियंत्रण में लाने की कोशिश की जा रही है।
भविष्य के लिए नई बिजली नीति की तैयारी
राज्य सरकार ने अक्टूबर से अगले मानसून तक पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए अलग योजना बनाने की बात कही है। साथ ही 2030 तक बिजली की बढ़ती जरूरत को ध्यान में रखते हुए नई व्यापक बिजली नीति तैयार करने की तैयारी है।
सरकार का जोर नवीकरणीय ऊर्जा के साथ बैटरी स्टोरेज और पंप्ड-स्टोरेज परियोजनाओं पर भी है। पर्याप्त भंडारण क्षमता विकसित होने पर दिन में पैदा होने वाली सौर ऊर्जा का इस्तेमाल शाम और रात की मांग पूरी करने में किया जा सकेगा।