उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज होती नजर आ रही है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ वाले तंज के बाद अब राष्ट्रीय लोक दल के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने पलटवार किया है। हाथरस के मुरसान में रालोद की ‘स्वाभिमान सम्मान पदयात्रा एवं समरसता अभियान’ की शुरुआत के दौरान केसी त्यागी ने कहा कि उनकी पार्टी को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम चवन्नी नहीं हैं, बल्कि महात्मा गांधी की तस्वीर वाला 500 रुपये का नोट हैं।”
दरअसल, अखिलेश यादव ने अगस्त 2026 में बिना नाम लिए रालोद प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी पर निशाना साधते हुए कहा था कि समाजवादी पार्टी ने गठबंधन के साथियों को ‘चवन्नी का रुपया’ बना दिया, इसके बावजूद वे साथ छोड़कर चले गए। अखिलेश की यह टिप्पणी उस राजनीतिक घटनाक्रम के संदर्भ में थी, जब जयंत चौधरी और रालोद ने समाजवादी पार्टी से गठबंधन समाप्त कर भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का साथ लिया था।
इस विवाद की जड़ 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए जयंत चौधरी के एक बयान से जुड़ी है। उस समय भाजपा की ओर से रालोद को अपने साथ लाने की कोशिशों के बीच जयंत चौधरी ने कहा था कि वह कोई ‘चवन्नी’ नहीं हैं, जिसे आसानी से पलटा जा सके। बाद में सपा और रालोद का गठबंधन समाप्त हुआ और रालोद एनडीए में शामिल हो गया। मौजूदा समय में जयंत चौधरी केंद्र सरकार में मंत्री हैं।
हाथरस के मुरसान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान केसी त्यागी ने अखिलेश यादव के बयान का जवाब देते हुए कहा कि रालोद को अपनी राजनीतिक ताकत साबित करनी है। उन्होंने कहा कि पार्टी ‘चवन्नी’ नहीं बल्कि 500 रुपये का नोट है। त्यागी ने अपने संबोधन में भाजपा और रालोद के गठबंधन का भी जिक्र किया और कहा कि रालोद जितना मजबूत होगा, एनडीए भी उतना ही मजबूत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी भविष्य में भी एनडीए के साथ रहेगी।
केसी त्यागी ने खुद और अपनी पार्टी को बार-बार राजनीतिक पाला बदलने वाला बताए जाने से भी इनकार किया। उन्होंने अपने संबोधन में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक संबंधों का उल्लेख किया। त्यागी ने कहा कि मुलायम सिंह यादव चौधरी चरण सिंह के राजनीतिक प्रभाव को समझते थे, लेकिन अगली पीढ़ी उस राजनीतिक विरासत को उसी तरह याद नहीं रख पाई।
केसी त्यागी ने अपने भाषण में भाजपा के चुनाव चिह्न कमल और रालोद के चुनाव चिह्न नल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर कभी ऐसा लगे कि कमल मुरझा रहा है तो नल से पानी लेकर उसे सींचना चाहिए। उनका यह बयान भाजपा और रालोद के बीच मौजूदा राजनीतिक गठबंधन के संदर्भ में था।
रालोद और सपा के बीच यह जुबानी टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दल 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। दोनों दलों के बीच पहले गठबंधन रहा है, लेकिन जयंत चौधरी के नेतृत्व वाला रालोद अब भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा है। ऐसे में अखिलेश यादव की पुरानी टिप्पणी और केसी त्यागी का ताजा जवाब उत्तर प्रदेश की बदलती गठबंधन राजनीति को लेकर चर्चा में है।
केसी त्यागी ने इस दौरान समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि संविधान में समान नागरिक संहिता का प्रावधान है, लेकिन कानून का मसौदा सामने आने के बाद सभी संबंधित पक्षों और राज्यों के साथ बातचीत होनी चाहिए। उनका कहना था कि कानून लागू करने में राज्यों की भी भूमिका होगी, इसलिए राज्यों समेत सभी पक्षों से विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।
केसी त्यागी इसी साल मार्च में जनता दल यूनाइटेड छोड़कर राष्ट्रीय लोक दल में शामिल हुए थे। इससे पहले वह जदयू में महासचिव, मुख्य प्रवक्ता और नीतीश कुमार के राजनीतिक सलाहकार जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। रालोद में शामिल होने के बाद ब्रज क्षेत्र में मुरसान का यह उनका पहला सार्वजनिक कार्यक्रम बताया गया।