दक्षिण एशियाई पर्यावरण कानून पर रिपोर्टिंग करने वाले संगठन साउथ एशियन रिपोर्टर ऑन एनवायरनमेंट लॉ (SAREL) के आकलन के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की पांच पीठों में पर्यावरण या जनहित से जुड़े पक्षों की मेरिट पर तय हुई 16 अपीलों में से एक भी अपील में अनुकूल फैसला नहीं आया। इसके विपरीत, उद्योग, परियोजना समर्थकों और संपत्ति मालिकों से जुड़े पक्षों को मेरिट पर तय 51 में से 30 मामलों में अनुकूल आदेश मिला। हालांकि यह आंकड़ा केवल इसी छह महीने की अवधि में तय अपीलों का आकलन है और इसे NGT के सभी मामलों के सामान्य परिणाम के रूप में नहीं देखा जा सकता।
SAREL ने NGT की दिल्ली स्थित प्रधान पीठ समेत पांच पीठों द्वारा जनवरी से जून 2026 के दौरान तय की गई कुल 119 अपीलों का अध्ययन किया। आकलन में पाया गया कि इन 119 मामलों में से 52 मामले मेरिट पर फैसला होने से पहले ही प्रक्रियात्मक आधारों पर निपटा दिए गए। इनमें समय-सीमा, अधिकार क्षेत्र, सुनवाई योग्य होने से जुड़े सवाल और अपील वापस लिया जाना जैसे कारण शामिल थे। यानी कुल मामलों का करीब 44 प्रतिशत हिस्सा इन प्रक्रियात्मक आधारों पर निपटा और उनमें मामले के मूल पर्यावरणीय मुद्दे पर न्यायाधिकरण का फैसला नहीं आया।
बाकी 67 मामलों में NGT ने मामले के गुण-दोष यानी मेरिट पर निर्णय दिया। इन्हीं मामलों में पर्यावरण या जनहित से जुड़े पक्षों की 16 अपीलें थीं और सभी में फैसला उनके पक्ष में नहीं गया। दूसरी ओर उद्योग, परियोजना समर्थकों और संपत्ति मालिकों की 51 मेरिट अपीलों में 30 मामलों में उन्हें अनुकूल आदेश मिला, जो करीब 58.8 प्रतिशत है। तीन अन्य मामलों में प्रधान पीठ ने यथास्थिति बनाए रखी।
अलग-अलग NGT पीठों में क्या रहा परिणाम?
पश्चिमी क्षेत्र की पीठ में पर्यावरण या जनहित से जुड़ी मेरिट पर तय सभी नौ अपीलें खारिज हो गईं। वहीं उद्योग, परियोजना समर्थकों और संपत्ति मालिकों से संबंधित 24 मेरिट मामलों में 15 में अनुकूल आदेश आया। रिपोर्ट के अनुसार, इस पीठ में परियोजना समर्थक पक्ष की कई सफल अपीलों में पहले से खारिज पर्यावरणीय मंजूरियों को रद्द कर मामलों को कमियों को दूर करने के बाद दोबारा विचार के लिए भेजा गया।
मध्य क्षेत्र की पीठ में पर्यावरण या जनहित पक्ष की तीनों मेरिट अपीलें सफल नहीं हुईं। उद्योग या परियोजना समर्थक पक्ष की पांच अपीलों में से एक में अनुकूल आदेश मिला। दिल्ली स्थित प्रधान पीठ में पर्यावरण से जुड़ी दोनों अपीलें खारिज हुईं, जबकि उद्योग या परियोजना समर्थक पक्ष की 10 मेरिट अपीलों में पांच में अनुकूल आदेश और तीन में यथास्थिति का आदेश सामने आया।
दक्षिणी क्षेत्र की पीठ में पर्यावरण या जनहित से जुड़ी एकमात्र मेरिट अपील भी सफल नहीं हुई। इसके मुकाबले उद्योग, परियोजना समर्थकों और संपत्ति मालिकों से संबंधित 12 मामलों में से नौ में अनुकूल आदेश आया। इस तरह SAREL के आकलन में अलग-अलग पीठों पर भी पर्यावरणीय पक्ष की सफलता का आंकड़ा इस अवधि में सीमित रहा।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना जून 2010 में संसद के कानून के तहत पर्यावरण से जुड़े विवादों के प्रभावी और तेजी से निपटारे के उद्देश्य से की गई थी। रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में उद्योग, परियोजना समर्थकों या संपत्ति मालिकों और पर्यावरण या जनहित पक्षों की सफलता के बीच अंतर को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि NGT को अपनी भूमिका और साहस को फिर से मजबूत करना चाहिए। यह उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है, जबकि 0% और 58.8% के आंकड़े SAREL के छह महीने के आकलन से जुड़े हैं।
यह आकलन ऐसे समय सामने आया जब 19 और 20 सितंबर को NGT की ओर से ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। NGT के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने सम्मेलन में कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों की पहचान करने से आगे बढ़कर ऐसे कानून, संस्थान और साझेदारियां विकसित करने की जरूरत है जो बदलती परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें। उन्होंने पर्यावरण कानून को तकनीक, नवाचार, टिकाऊ वित्त और न्यायसंगत बदलाव जैसे क्षेत्रों के साथ जोड़कर आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।