डॉ. अंकिता यारगल कर्नाटक के बागलकोट जिले में मौजूद नम्मा क्लिनिक में मेडिकल ऑफिसर के पद पर काम कर रही थीं। वे बागलकोट के विधायक उमेश मेटी की भतीजी हैं। अब उनके खिलाफ जांच शुरू हो गई है क्योंकि उन पर आरोप है कि नौकरी करते हुए ही वे एक निजी मेडिकल कॉलेज से पीजी कोर्स भी कर रही थीं और इस दौरान उन्हें सरकारी वेतन भी मिलता रहा।
बागलकोट जिला पंचायत के सीईओ गजानन बाले की ओर से जारी एक नोटिस में कहा गया है कि डॉ. यारगल वंबे कॉलोनी स्थित नम्मा क्लिनिक से 3 मार्च 2026 से लेकर सितंबर तक गायब रहीं। इस वजह से क्लिनिक में लंबे समय तक कोई मेडिकल ऑफिसर मौजूद नहीं था और मरीजों को दिक्कत हुई।
नोटिस में यह भी बताया गया है कि इस पूरे समय के दौरान वे एस. निजलिंगप्पा मेडिकल कॉलेज से अपनी पीजी पढ़ाई कर रही थीं, लेकिन उनका वेतन या मानदेय लगातार आता रहा।
मामले में पहली सुनवाई 15 सितंबर को हुई थी। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने उन्हें इस सुनवाई में शामिल होने की अनुमति भी दी थी, लेकिन डॉ. यारगल उसमें हाजिर नहीं हुईं। अब उन्हें 18 सितंबर को सुबह 10 बजे सीईओ के सामने पेश होने के लिए कहा गया है। उन्हें अपने साथ जरूरी दस्तावेज और लिखित स्पष्टीकरण भी लाने को कहा गया है।
प्रशासन ने साफ किया है कि जांच में दोषी पाए जाने पर उन्हें दी गई सैलरी या मानदेय की वसूली नियमों के अनुसार की जा सकती है। अगर पेशेवर लापरवाही साबित होती है तो अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है और यह मामला कर्नाटक मेडिकल काउंसिल यानी केएमसी और नेशनल मेडिकल कमीशन यानी एनएमसी को भी भेजा जा सकता है। अगर वे अगली सुनवाई में भी नहीं आईं तो उनके खिलाफ एकतरफा फैसला लिया जा सकता है।
इस बीच जिला स्वास्थ्य अधिकारी राजकुमार यारगल ने डॉ. अंकिता यारगल को ड्यूटी से हटा दिया है। फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है और अधिकारियों की ओर से अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
