इजराइल ने मंगलवार को ब्रिटेन के यरुशलम स्थित काउंसलर को बंद करने का ऐलान किया है। यह कदम वेस्ट बैंक में इजराइली बस्तियों पर ब्रिटेन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में उठाया गया है।
इजराइली विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि ब्रिटिश विदेश सचिव एड मिलिबैंड द्वारा ब्रिटिश संसद में लगाए गए आरोप “नैतिक रूप से विकृत” और “सरासर झूठ” हैं। उन्होंने इसे संप्रभु देश के आंतरिक मामलों में खुला हस्तक्षेप बताया।
सार ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सहमति से यह फैसला लिया। उन्होंने घोषणा की कि पूर्वी यरुशलम में ब्रिटेन का काउंसलर, जो फिलिस्तीनी अथॉरिटी से जुड़ा हुआ है, बंद कर दिया जाएगा।
अन्य जवाबी कदम
इजराइल ने ब्रिटेन को गाजा के लिए अमेरिकी नेतृत्व वाले समन्वय मिशन में भाग लेने से भी रोक दिया है। इसके अलावा 12 ब्रिटिश अधिकारियों और नेताओं को इजराइल में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ब्रिटेन द्वारा वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी सुरक्षा बलों को ट्रेनिंग देने का काम भी बंद कर दिया जाएगा।
ब्रिटेन ने क्या कहा था
ब्रिटिश विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने वेस्ट बैंक में इजराइली बसने वालों की हिंसा को “एथनिक क्लींजिंग” बताया था। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन अब वेस्ट बैंक की पूरी जमीन पर इजराइली कब्जे को गैरकानूनी मानेगा। ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने बस्तियों से आने वाले सामानों पर आयात प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है।
मिलिबैंड ने कहा, “ब्रिटिश जनता नहीं चाहती कि हम बस्तियों के उत्पादों को अपनी दुकानों में जगह दें।” उन्होंने दो-राज्य समाधान को नष्ट होने से बचाने की बात भी कही।
अमेरिका का रुख
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ब्रिटेन की तरह इजराइल पर प्रतिबंध नहीं लगाएगा। उन्होंने कहा कि वेस्ट बैंक में किसी भी अस्थिर करने वाले कदम का वे समर्थन नहीं करते।
यह विवाद इजराइल में 27 अक्टूबर को होने वाले चुनावों से ठीक पहले सामने आया है, जिसमें नेतन्याहू वेस्ट बैंक बस्तियों के समर्थन पर जोर दे रहे हैं।