9/11 आतंकी हमले की 25वीं बरसी के मौके पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई और पाकिस्तान से जुड़े कई पुराने सवालों को सामने रखा। अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन से लेकर अबू बकर अल-बगदादी तक उन आतंकियों का जिक्र किया, जिनके खिलाफ अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की। इस दौरान पाकिस्तान में लादेन के लंबे समय तक छिपे रहने का मुद्दा भी चर्चा में आया।
ओसामा बिन लादेन अल-कायदा का संस्थापक था और 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए आतंकी हमलों का प्रमुख जिम्मेदार माना गया। इन हमलों में करीब 3,000 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान में सैन्य अभियान शुरू किया और अल-कायदा के नेटवर्क को निशाना बनाया। करीब एक दशक तक तलाश के बाद अमेरिकी विशेष बलों ने मई 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में एक अभियान के दौरान लादेन को मार गिराया।
लादेन के पाकिस्तान में पाए जाने को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। वह पाकिस्तान के एबटाबाद शहर में एक परिसर में रह रहा था, जो पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों से बहुत दूर नहीं था। अमेरिका ने बिना पाकिस्तान को पहले जानकारी दिए यह अभियान चलाया था। इस घटना ने दोनों देशों के संबंधों में भी बड़ा तनाव पैदा किया था।
अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई के उदाहरण के तौर पर बाद के वर्षों में इस्लामिक स्टेट के सरगना अबू बकर अल-बगदादी का भी जिक्र किया। बगदादी ने 2014 में इराक और सीरिया के बड़े हिस्से में तथाकथित खिलाफत की घोषणा की थी। उसका संगठन इस्लामिक स्टेट दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठनों में शामिल हो गया था।
अमेरिकी विशेष बलों ने अक्टूबर 2019 में सीरिया के इदलिब क्षेत्र में बगदादी के ठिकाने पर कार्रवाई की थी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, बगदादी सुरंग में भाग गया था और उसने विस्फोटक जैकेट में विस्फोट कर खुद को उड़ा लिया। इस अभियान के बाद अमेरिका ने इसे इस्लामिक स्टेट के खिलाफ बड़ी सफलता बताया था।
अमेरिका की ओर से संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद के इन मामलों का उल्लेख ऐसे समय किया गया है जब पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। खासतौर पर लादेन का पाकिस्तान में पाया जाना अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों के इतिहास में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली घटनाओं में शामिल है।
9/11 के बाद आतंकवाद का वैश्विक स्वरूप भी काफी बदला है। अल-कायदा को कमजोर किए जाने के बावजूद उसका नेटवर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। इसके अलावा इस्लामिक स्टेट जैसे संगठनों के उभरने से आतंकवाद का खतरा अलग-अलग क्षेत्रों में फैल गया। हालिया आकलनों के मुताबिक अल-कायदा की गतिविधियां आज भी अफ्रीका और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में जारी हैं।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका का यह संदेश ऐसे समय आया है जब 9/11 हमलों की 25वीं बरसी पर दुनिया एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ पिछले ढाई दशकों की कार्रवाई और उससे मिली सीख की समीक्षा कर रही है। लादेन और बगदादी जैसे बड़े आतंकी सरगनाओं के मारे जाने के बावजूद आतंकवादी नेटवर्क का पूरी तरह खत्म न होना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
पाकिस्तान के संदर्भ में भी आतंकवाद का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार उठता रहा है। संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न रिपोर्टों में क्षेत्र में सक्रिय आतंकी संगठनों और उनके नेटवर्क को लेकर चिंता जताई गई है। ऐसे में अमेरिका द्वारा संयुक्त राष्ट्र में लादेन और अन्य आतंकी सरगनाओं का उल्लेख पाकिस्तान के लिए एक बार फिर असहज करने वाला संदेश माना जा रहा है।