11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए आतंकवादी हमले को आज 25 साल पूरे हो गए हैं। उस दिन अल-कायदा के 19 आतंकवादियों ने चार यात्री विमानों का अपहरण किया था। इनमें से तीन विमानों को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और वॉशिंगटन के पास पेंटागन को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया, जबकि चौथा विमान यात्रियों की कोशिश के बाद पेंसिल्वेनिया के एक खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हमले में 2,977 लोगों की मौत हुई थी।
हमले की साजिश कैसे शुरू हुई?
9/11 की साजिश अचानक नहीं बनी थी। अमेरिकी जांच के अनुसार, अल-कायदा की अमेरिका के खिलाफ गतिविधियां कई वर्षों से चल रही थीं। 1993 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए बम धमाके, 1998 में केन्या और तंजानिया स्थित अमेरिकी दूतावासों पर हमले और वर्ष 2000 में यूएसएस कोल पर हमला इसी अभियान का हिस्सा थे।
1998 में अमेरिकी दूतावासों पर हुए हमलों के बाद खालिद शेख मोहम्मद को अमेरिका के भीतर हमला करने की योजना बनाने के लिए ओसामा बिन लादेन की मंजूरी मिली। 9/11 आयोग ने बाद में खालिद शेख मोहम्मद को हमले की साजिश का मुख्य योजनाकार बताया। वह विमानों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की योजना पर पहले से विचार कर रहा था।
19 अपहरणकर्ता एक ही समूह से नहीं थे
हमले में शामिल 19 लोग एक ही पृष्ठभूमि से नहीं आए थे। साजिश में जर्मनी के हैम्बर्ग में सक्रिय अल-कायदा नेटवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका थी। मोहम्मद अट्टा, मरवान अल-शेही और जियाद जर्राह विमान उड़ाने वाले प्रमुख अपहरणकर्ताओं में शामिल थे। हानी हंजूर चौथा पायलट-अपहरणकर्ता था।
बाकी 15 लोगों को तथाकथित ‘मसल हाइजैकर’ की भूमिका दी गई थी। उनका काम यात्रियों और विमान के कर्मचारियों पर काबू पाना था। इनमें से कई लोग संयुक्त अरब अमीरात के रास्ते अमेरिका पहुंचे। अल-कायदा से जुड़े मददगारों ने उनके लिए टिकट, होटल और यात्रा से संबंधित व्यवस्थाएं करने में सहायता की थी। 9/11 आयोग के अनुसार, इन 15 में से 14 लोग जून 2001 के अंत तक अमेरिका पहुंच चुके थे और ज्यादातर पर्यटक वीजा पर आए थे।
हमलावरों ने सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान भी खींचा था
9/11 से पहले ही कुछ अपहरणकर्ताओं ने अमेरिकी हवाई अड्डों की सुरक्षा व्यवस्था में चेतावनी संकेत पैदा किए थे। मोहम्मद अट्टा को मेन के पोर्टलैंड से बोस्टन जाने वाली उड़ान से पहले सुरक्षा जांच में चिन्हित किया गया था। इसके अलावा फ्लाइट 11 के तीन अन्य अपहरणकर्ता भी बोस्टन में सुरक्षा जांच के दौरान चिन्हित हुए थे।
वॉशिंगटन के डलेस हवाई अड्डे पर भी फ्लाइट 77 से जुड़े कई अपहरणकर्ताओं ने सुरक्षा अलार्म सक्रिय किए थे। कुछ की धातु जांच हुई और एक यात्री के सामान की विस्फोटक पदार्थों के लिए जांच भी की गई। इसके बावजूद सभी विमान में सवार होने में सफल रहे। बाद में 9/11 आयोग ने इन सुरक्षा जांचों को बेहद अपर्याप्त बताया।
हमले से पहले लगातार मिल रही थीं चेतावनियां
अमेरिकी एजेंसियों को 9/11 से पहले ओसामा बिन लादेन और अल-कायदा की ओर से अमेरिका पर संभावित हमले की कई चेतावनियां मिल चुकी थीं। 9/11 आयोग ने बाद में कहा कि वर्ष 2001 की गर्मियों तक खतरे के संकेत बेहद गंभीर हो चुके थे।
1 अगस्त 2001 को एफबीआई ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका के भीतर हमला होने की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। इसके दो दिन बाद एक अन्य खुफिया चेतावनी में कहा गया कि अल-कायदा के हमले का खतरा बना रह सकता है। 6 अगस्त को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश को “Bin Ladin Determined to Strike in US” शीर्षक वाली खुफिया जानकारी दी गई थी।
11 सितंबर की सुबह क्या हुआ?
11 सितंबर की सुबह मोहम्मद अट्टा और अब्दुल अजीज अल-ओमारी पोर्टलैंड से बोस्टन पहुंचे। इसी दौरान चारों विमानों में अपहरणकर्ताओं की टीमें अपनी जगह ले चुकी थीं। सुबह करीब 8 बजे तक सभी टीमें विमान सुरक्षा व्यवस्था को पार कर चुकी थीं।
अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट 11 ने बोस्टन से लॉस एंजिल्स के लिए सुबह 7:59 बजे उड़ान भरी। करीब 8:14 बजे विमान के चालक दल का हवाई यातायात नियंत्रण से संपर्क बंद हो गया। इसके बाद विमान के अपहरण की पुष्टि हुई। विमान में मौजूद परिचारिकाओं ने जमीन पर मौजूद कर्मचारियों को यात्रियों पर हमले और कॉकपिट तक पहुंच बंद होने की जानकारी दी।
सुबह 8:46 बजे फ्लाइट 11 न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के उत्तरी टावर से टकराई। विमान में मौजूद बड़ी मात्रा में ईंधन के कारण आग तेजी से फैल गई। बाद की जांच में पाया गया कि आग और टक्कर से इमारत की संरचना गंभीर रूप से कमजोर हुई, जिसके बाद टावर ढह गया।
दूसरे विमान ने दक्षिणी टावर को बनाया निशाना
यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 175 सुबह 9:03 बजे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दक्षिणी टावर से टकराई। उस समय तक पहले टावर में लगी आग की तस्वीरें दुनिया भर में प्रसारित हो रही थीं और दूसरे विमान की टक्कर का दृश्य भी सीधे प्रसारण में कैद हुआ।
इसके बाद यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 93 का अपहरण सुबह 9:28 बजे हुआ। विमान में मौजूद यात्रियों को जमीन पर फोन के जरिए वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमलों की जानकारी मिल गई थी। सुबह 9:57 बजे यात्रियों ने अपहरणकर्ताओं के खिलाफ जवाबी कार्रवाई शुरू की।
यात्रियों की इस कोशिश के बाद फ्लाइट 93 वॉशिंगटन तक नहीं पहुंच सकी और सुबह 10:03 बजे पेंसिल्वेनिया के शैंक्सविल के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। 9/11 आयोग के अनुसार, विमान का संभावित निशाना अमेरिकी कैपिटल या व्हाइट हाउस हो सकता था।
पेंटागन पर भी हुआ हमला
अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट 77 का भी अपहरण किया गया था। सुबह 9:37 बजे यह विमान पेंटागन से टकराया। विमान में सवार सभी 64 लोगों की मौत हुई, जबकि पेंटागन के अंदर भी 125 लोगों की जान गई। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार पेंटागन हमले में कुल मृतकों की संख्या 189 थी।
इसके बाद सुबह 9:59 बजे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का दक्षिणी टावर ढह गया। इसके करीब आधे घंटे बाद, 10:28 बजे उत्तरी टावर भी गिर गया। इन घटनाओं में बड़ी संख्या में नागरिकों के साथ बचाव कार्य में जुटे अग्निशामकों और पुलिस अधिकारियों की भी मौत हुई।
जॉर्ज बुश को कैसे मिली हमले की खबर?
हमले के समय तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश फ्लोरिडा में बच्चों के साथ एक कक्षा में मौजूद थे। सुबह करीब 9:05 बजे उनके चीफ ऑफ स्टाफ एंड्रयू कार्ड ने उनके पास जाकर उन्हें बताया कि दूसरा विमान भी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकरा गया है। यह क्षण बाद में 9/11 की सबसे चर्चित तस्वीरों में शामिल हो गया।
ओसामा बिन लादेन तक कैसे पहुंची अमेरिका की खुफिया एजेंसियां?
9/11 हमलों के पीछे जिम्मेदार माने जाने वाला ओसामा बिन लादेन करीब एक दशक तक अमेरिका की पकड़ से बाहर रहा। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने धीरे-धीरे उसके नेटवर्क और एक महत्वपूर्ण संदेशवाहक की पहचान की। वर्ष 2010 तक उस संदेशवाहक का संबंध पाकिस्तान के एबटाबाद स्थित एक परिसर से जोड़ा गया।
2 मई 2011 को अमेरिकी विशेष अभियान बलों ने एबटाबाद स्थित परिसर में कार्रवाई की और ओसामा बिन लादेन को मार गिराया। 9/11 के 25 साल बाद भी यह हमला अमेरिका और पूरी दुनिया के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण और भयावह आतंकवादी घटनाओं में गिना जाता है।