जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी ने इसे कभी स्वीकार नहीं किया और आगे भी नहीं करेगी। उनका यह बयान इसलिए चर्चा में है क्योंकि कुछ दिन पहले श्रीनगर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के उद्घाटन समारोह में उमर अब्दुल्ला और उनके पिता फारूक अब्दुल्ला पूरे ‘वंदे मातरम्’ के दौरान सम्मान में खड़े रहे थे। पूरा गीत करीब 3 मिनट 10 सेकंड तक चला था।
श्रीनगर के फिल्म महोत्सव में प्रोटोकॉल के तहत ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंद गाए गए थे। इस दौरान उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला अपनी जगह पर खड़े रहे। इसके बाद कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक मतभेद सामने आने लगे। कांग्रेस अपने 1937 के प्रस्ताव का हवाला देते हुए ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो छंद गाए जाने की बात कह रही है।
अब उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने एक राजनीतिक दल के रूप में कभी ‘वंदे मातरम्’ को नहीं अपनाया और भविष्य में भी इसे नहीं अपनाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा कानून और सरकारी प्रोटोकॉल के तहत जो कानूनी जिम्मेदारी है, उसका पालन करना होगा। यानी सरकारी कार्यक्रमों में लागू नियमों के मुताबिक गीत बजाए जाने पर उसका सम्मान करना अलग बात है और पार्टी की ओर से इसे अपनाना अलग।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कानून बनाया गया है और इसके सभी पदों को गाना अनिवार्य किया गया है। उनके मुताबिक यह नियम केवल जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में सरकारी कार्यक्रमों के प्रोटोकॉल का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई हो सकती है।
इस मुद्दे पर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच गठबंधन के भीतर मतभेद भी खुलकर सामने आए हैं। कांग्रेस ने 1937 के अपने ऐतिहासिक प्रस्ताव का हवाला देते हुए पहले दो छंदों तक सीमित रहने की बात कही है। वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के ऐसे वीडियो साझा किए, जिनमें वे ‘वंदे मातरम्’ के पूरे संस्करण के दौरान खड़े नजर आए थे।
उमर अब्दुल्ला के बयान से यह साफ हो गया है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस इस मुद्दे पर एक ही राय नहीं रखते। एक तरफ कांग्रेस पूरे गीत को लेकर ऐतिहासिक प्रस्ताव और समावेशी सोच की बात कर रही है, वहीं उमर अब्दुल्ला कानूनी दायित्वों का पालन करने के साथ-साथ पार्टी के स्तर पर ‘वंदे मातरम्’ को स्वीकार नहीं करने की बात कह रहे हैं।
‘वंदे मातरम्’ को लेकर देशभर में जारी राजनीतिक बहस के बीच उमर अब्दुल्ला का यह बयान जम्मू-कश्मीर की राजनीति के साथ-साथ कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के रिश्तों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास बात यह है कि कुछ दिन पहले पूरे गीत के दौरान सम्मान में खड़े रहने वाले उमर अब्दुल्ला अब पार्टी की विचारधारा और कानूनी प्रोटोकॉल के बीच अंतर स्पष्ट कर रहे हैं।