14 अप्रैल को पूरे देश में पना संक्रांति या महाबिषुब संक्रांति का त्योहार मनाया जा रहा है।
यह दिन खास रूप से ओडिशा और बंगाल में बहुत महत्व रखता है। ओडिशा में इसे पना संक्रांति कहते हैं, जबकि बंगाल में इसे पूला बोइशाख या बंगाली नववर्ष के रूप में मनाया जाता है।
मुख्य बातें:
- पना संक्रांति / महाबिषुब संक्रांति पर जगन्नाथ जी की विशेष पूजा
- ओडिशा में नए वर्ष की शुरुआत और मिठाइयों का त्योहार
- बंगाल में पूला बोइशाख के रूप में बंगाली नववर्ष मनाया जाता है
- सूर्य देवता की पूजा और शुभ कार्य शुरू करने का शुभ मुहूर्त
जगन्नाथ जी का महत्व ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन जगन्नाथ जी नए वर्ष की शुरुआत करते हैं। भक्त बड़े उत्साह से मंदिर पहुंचकर दर्शन करते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं।
बंगाल में पूला बोइशाख बंगाल में इस दिन को पूला बोइशाख कहा जाता है। लोग नए कपड़े पहनते हैं, मिठाइयां बांटते हैं और शुभ कार्यों की शुरुआत करते हैं। कई जगहों पर मेले लगते हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
धार्मिक मान्यता पना संक्रांति सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने का दिन है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह नया साल शुरू करने का शुभ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन दान-पुण्य, पूजा-पाठ और नए काम शुरू करने का विशेष महत्व है।
उत्सव की तैयारियां ओडिशा और पश्चिम बंगाल दोनों जगहों पर इस त्योहार को लेकर भारी उत्साह है। मंदिरों और घरों में साफ-सफाई के साथ-साथ पूजा की तैयारियां जोरों पर हैं।