कर्नाटक में गहराते गंभीर सूखे के संकट और किसानों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। अपने इस पत्र में खड़गे ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) के अंतर्गत ₹3,705.30 करोड़ की केंद्रीय सहायता अविलंब जारी करने का आग्रह किया है। उन्होंने बल देकर कहा कि सूखे से पीड़ित किसानों और आम नागरिकों को राहत प्रदान करना एक अत्यंत संवेदनशील और मानवीय विषय है, जिसे केंद्र तथा राज्य सरकार के मध्य किसी भी राजनीतिक मतभेद से परे रखकर देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि मानसून की भारी विफलता के कारण कर्नाटक के 236 तालुकों में से 195 से अधिक तालुका भीषण सूखे की चपेट में आ चुके हैं, जिससे लगभग 31 से 35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। इस आपदा के कारण कृषि क्षेत्र को ₹30,000 करोड़ से अधिक का प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान हुआ है, जिससे राज्य के लाखों छोटे एवं सीमांत किसानों के जीवन और आजीविका पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री के समक्ष रखी गईं 6 मुख्य मांगें:
- ₹3,705.30 करोड़ की तत्काल NDRF सहायता: राज्य सरकार द्वारा प्रेषित ज्ञापन के आधार पर राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष से ₹3,705.30 करोड़ की अग्रिम राहत राशि अविलंब स्वीकृत कर जारी की जाए।
- अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (IMCT) का दौरा: सूखे से हुए वास्तविक नुकसान का जमीनी स्तर पर सटीक आकलन करने हेतु विशेषज्ञ अंतर-मंत्रालयी टीम को तत्काल कर्नाटक भेजा जाए।
- मनरेगा (MGNREGA) कार्य दिवसों में वृद्धि: सूखा प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सुरक्षा प्रदान करने के लिए मनरेगा के अंतर्गत प्रति परिवार कार्य दिवसों की संख्या को 100 दिनों से बढ़ाकर 150 दिन किया जाए।
- पीने के पानी और मवेशी चारे की आपात व्यवस्था: ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पेयजल संकट के निवारण और पशुधन को बचाने हेतु गौशालाओं तथा चारा डिपो की स्थापना के लिए विशेष निधि आवंटित की जाए।
- कृषि ऋण स्थगन एवं ब्याज राहत: सूखा प्रभावित किसानों के अल्पकालिक कृषि ऋणों के पुनर्भुगतान पर रोक लगाई जाए तथा ब्याज दरों में पूर्ण छूट प्रदान की जाए।
- फसल बीमा दावों का त्वरित भुगतान: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के अंतर्गत पीड़ित किसानों के बीमा दावों का बिना किसी प्रशासनिक विलंब के शीघ्र अति शीघ्र शत-प्रतिशत निस्तारण किया जाए।
अपने पत्र के अंत में मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि जब राज्य के किसान गंभीर प्राकृतिक आपदा और आर्थिक तंगी से जूझ रहे हों, तब संघवाद की भावना के तहत केंद्र सरकार का यह संवैधानिक और नैतिक दायित्व बनता है कि वह बिना किसी देरी के राज्य की सहायता हेतु आगे आए। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस विषय की गंभीरता को समझते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी।