आईआईटी बॉम्बे में दूसरे वर्ष के बीटेक छात्र की आत्महत्या के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। छात्र की मौत से कुछ घंटे पहले परीक्षा के दौरान कथित तौर पर मोबाइल फोन और चैटजीपीटी के इस्तेमाल का मामला सामने आया था। इस परीक्षा में प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला निरीक्षक की भूमिका में थे। घटना के बाद उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने और जातिगत भेदभाव के आरोपों को लेकर पुलिस जांच शुरू हुई, जबकि आईआईटी बॉम्बे ने उन्हें डीन ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स के पद से हटा दिया।
इस कार्रवाई के बाद आईआईटी बॉम्बे के कई फैकल्टी सदस्यों ने प्रोफेसर दुल्ला के समर्थन में मार्च निकाला। फैकल्टी फोरम का कहना है कि परीक्षा के दौरान छात्र के खिलाफ कार्रवाई करते समय दुल्ला ने संस्थान की सीनेट द्वारा मंजूर परीक्षा प्रक्रिया का पालन किया था। फोरम ने उनके खिलाफ मीडिया में सामने आई कुछ रिपोर्टों को लेकर आपत्ति जताई और कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
आईआईटी दिल्ली और मद्रास के फैकल्टी संगठनों ने क्या कहा?
आईआईटी दिल्ली के फैकल्टी फोरम ने भी प्रोफेसर दुल्ला के समर्थन में बयान जारी किया। फोरम के अनुसार, परीक्षा में शैक्षणिक अनुशासन और निष्पक्षता बनाए रखना शिक्षकों की जिम्मेदारी है और इस मामले में दुल्ला अपनी आधिकारिक जिम्मेदारी निभा रहे थे। फोरम ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों से शिक्षकों के बीच परीक्षा प्रक्रिया लागू करने को लेकर चिंता पैदा हुई है और शैक्षणिक संस्थानों में निष्पक्षता तथा अकादमिक ईमानदारी बनाए रखने के लिए शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारियां निभाने का भरोसा मिलना चाहिए।
वहीं आईआईटी मद्रास के फैकल्टी संगठन ने मामले में जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से जिम्मेदार ठहराने से बचने की अपील की। संगठन ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालना, मीडिया ट्रायल या सोशल मीडिया पर अटकलें लगाना मामले से जुड़े सभी पक्षों को नुकसान पहुंचा सकता है और न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। फैकल्टी संगठन ने यह भी कहा कि शिक्षकों को परीक्षा की शुचिता बनाए रखने की जिम्मेदारी दी जाती है और उन्हें सद्भावना के साथ यह जिम्मेदारी निभाने की स्थिति मिलनी चाहिए।
मामले की पृष्ठभूमि में 18 सितंबर को हुई परीक्षा है, जिसमें दूसरे वर्ष के बीटेक छात्र को कथित तौर पर मोबाइल फोन के इस्तेमाल के मामले में पकड़ा गया था। आईआईटी बॉम्बे के अनुसार, छात्र पर परीक्षा के दौरान चैटजीपीटी के इस्तेमाल का आरोप था। इसके बाद छात्र की मौत ने पूरे कैंपस में विरोध और बहस को जन्म दिया। छात्रों के एक वर्ग ने परीक्षा नियमों, संस्थागत व्यवस्था, शिकायत निवारण प्रणाली और छात्र सहायता तंत्र को लेकर सवाल उठाए हैं।
घटना के बाद आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने छात्रों की कई मांगों पर चर्चा की और परीक्षा में अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े नियमों की समीक्षा करने की बात कही है। संस्थान ने अपनी ओर से पहले जारी किए गए उस बयान के लिए भी माफी मांगी, जिसमें छात्र की मौत की परिस्थितियों पर जांच पूरी होने से पहले टिप्पणी की गई थी। प्रशासन ने कहा कि मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।
छात्र संगठनों की ओर से कुल 18 मांगें रखी गई हैं, जिनमें मामले की जांच, छात्र कल्याण व्यवस्था में सुधार, शिकायतों के निपटारे की बेहतर व्यवस्था और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को मजबूत करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। कुछ छात्र प्रोफेसर दुल्ला के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अलग राय रखते हैं, जबकि अन्य का कहना है कि परीक्षा में कथित नकल के मामले में कार्रवाई करना शिक्षक की जिम्मेदारी का हिस्सा था। इस तरह कैंपस में इस मामले को लेकर छात्रों और फैकल्टी के बीच अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं।
प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला फिलहाल मामले की जांच के केंद्र में हैं। आईआईटी बॉम्बे ने उन्हें डीन के प्रशासनिक पद से हटा दिया है, लेकिन वे संस्थान के फैकल्टी सदस्य बने हुए हैं। पुलिस की जांच और संस्थागत प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही आरोपों और घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।