मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस पार्टी और विपक्ष द्वारा चलाए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर तीखा हमला बोला है। नरसिंहपुर में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पार्टी पर कड़े प्रहार करते हुए उसके दोहरे मापदंडों और चुनावी राजनीति के पुराने इतिहास को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि चुनाव जैसी संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के नाम पर किसी भी प्रकार की अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि जब केरल और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में कांग्रेस पार्टी की सरकारें बनती हैं, तब वह विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को पूरी तरह सही मानती है। परंतु जब अन्य राज्यों में चुनाव परिणामों में उसे हार का सामना करना पड़ता है, तब वह तुरंत चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बेबुनियाद सवाल खड़े करने लगती है। उन्होंने कांग्रेस से आत्मनिरीक्षण करने की नसीहत देते हुए पार्टी को उसके पुराने राजनीतिक फैसलों और इतिहास का आईना दिखाया।
कांग्रेस के फैसलों और इतिहास पर उठाए गंभीर सवाल
अपने संबोधन के दौरान सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस पार्टी के अतीत के कई चर्चित राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र किया। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए याद दिलाया कि पार्टी ने अतीत में देश के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) टी.एन. शेषन तक को भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतार दिया था।
इसके साथ ही, उन्होंने पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि उस दौरान पंजाब में आतंकवाद को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के.पी.एस. गिल से भी कांग्रेस का झंडा पकड़वाया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो दल खुद संवैधानिक पदों पर रहे व्यक्तियों और संस्थाओं का अपने राजनीतिक हितों के लिए इस तरह इस्तेमाल करता रहा हो, उसे आज स्वतंत्र संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाने से पहले अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए।
‘नेहरू-गांधी परिवार ने देश के नेतृत्व को मान लिया अपनी जागीर’
वंशवाद और राजनीतिक वर्चस्व को लेकर कांग्रेस पर हमला बोलते हुए सीएम मोहन यादव ने कहा कि देश की आजादी के बाद लगभग 600 रियासतों ने स्वेच्छा से अपने अधिकार देश को सौंप दिए थे, लेकिन वह सारा राजनीतिक अधिकार धीरे-धीरे कांग्रेस पार्टी के भीतर ही केंद्रित होकर रह गया। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू-गांधी परिवार ने देश के राजनीतिक नेतृत्व और सत्ता को अपनी ‘आजीवन जागीर’ समझ लिया है, और आज जब वे सत्ता से बाहर हैं तो लोकतांत्रिक संस्थाओं को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं।
सरकार की प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आम नागरिकों, युवाओं और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रदेश में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट दर में भारी कमी दर्ज की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करके राजनीतिक रोटियां सेकने वाले दलों को जनता कभी माफ नहीं करेगी।