मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अंतर्गत आने वाली हाई-प्रोफाइल बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में वन विकास निगम और प्रशासन द्वारा की गई एक कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। क्षेत्र के बारेला आदिवासी समुदाय के 12 गरीब परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाने, उनकी खड़ी फसलों को ट्रैक्टर से रौंदे जाने और पानी के एकमात्र स्रोत कुएं को मिट्टी से भर दिए जाने की घटना सामने आई है। इस अमानवीय और कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की सूचना मिलते ही केंद्रीय कृषि मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तुरंत देर शाम कोसमी गांव पहुंचे और धरने पर बैठे प्रभावित ग्रामीणों से मुलाकात की।
प्रभावित परिवारों का दर्द और उनकी सिसकियां देखकर बेहद भावुक और आक्रोशित हुए शिवराज सिंह चौहान ने इसे “जुल्म की पराकाष्ठा” करार दिया। उन्होंने मौके पर मौजूद प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि गरीबों और आदिवासियों के आशियाने उजाड़ने तथा उनकी आजीविका को नष्ट करने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने हमेशा पार्टी को समर्थन दिया और जिनके वोटों से सरकारें बनती हैं, उनके साथ इस तरह का अन्याय कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्य सचिव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को किया फोन, सीएम से चर्चा की बात
घटनास्थल पर जिला प्रशासन या वन विभाग के किसी वरिष्ठ अधिकारी के मौजूद न मिलने पर शिवराज सिंह चौहान का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने तुरंत मौके से ही मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव (CS) अशोक वर्णवाल को फोन किया और इस कठोर कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अपनी सख्त नाराजगी दर्ज कराई। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से भी फोन पर संपर्क कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वे इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से व्यक्तिगत रूप से चर्चा करेंगे।
प्रभावित परिवारों के लिए नए पक्के मकान और भोजन-आवास का ऐलान
पीड़ितों को ढांढस बंधाते हुए शिवराज सिंह चौहान ने मौके पर ही कई बड़े ऐलान किए और प्रशासनिक स्तर पर तुरंत राहत पहुंचाने के निर्देश दिए:
- पक्के आवास का निर्माण: जिन गरीब परिवारों के आशियाने तोड़े गए हैं, उन सभी के लिए नए और पक्के मकान बनवाए जाएंगे।
- अस्थायी व्यवस्था: जब तक नए घरों का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक प्रभावित परिवारों के लिए रहने और खाने-पीने का समुचित प्रबंध किया जाएगा।
- आजीविका की सुरक्षा: फसलों और जल स्रोतों को हुए नुकसान की भरपाई और दोषियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है, जहां एक तरफ केंद्रीय मंत्री ने खुद अपने ही गृहक्षेत्र में प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, वहीं विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर हो रहे हैं।