पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) के मंधोल गांव में पाकिस्तानी हुकूमत और सैन्य नियंत्रण के विरुद्ध एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक जनाक्रोश देखने को मिला है। जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) के बैनर तले आयोजित एक विशाल जनसभा में 25 हजार से अधिक स्थानीय नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर जबरदस्त प्रदर्शन किया। उग्र प्रदर्शनकारियों ने इस्लामाबाद के शासन को सिरे से खारिज करते हुए भारत और पीओके को विभाजित करने वाली नियंत्रण रेखा (LoC) को तत्काल समाप्त करने और पुंछ-मेंढर क्षेत्र को जोड़ने वाले पुराने पारंपरिक मार्गों को पुनः खोलने की जोरदार मांग उठाई।
इस विशाल रैली को संबोधित करते हुए अवामी एक्शन कमेटी के प्रमुख नेता सरदार अमान खान ने पाकिस्तानी नियंत्रण और सेना के दमनकारी रवैये पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने मंच से जनसमूह से सीधा प्रश्न करते हुए पूछा कि क्या दोनों ओर के परिवारों को अलग करने वाली सीजफायर लाइन को खत्म किया जाना चाहिए, जिस पर उपस्थित हजारों लोगों ने हाथ उठाकर अपना प्रचंड समर्थन दिया। इसके पश्चात उन्होंने पूछा कि क्या एलओसी पर लगी कंटीली तारों और बाड़ (फेंसिंग) को हटाकर पुंछ तथा मेंढर जाने वाले ऐतिहासिक रास्तों को बहाल करना चाहिए, जिसे लेकर जनसभा में पाकिस्तान विरोधी नारों की गूंज सुनाई दी।
पीओके में यह विशाल जनाक्रोश वहां व्याप्त भयंकर आर्थिक संकट, खाद्यान्न की कमी, बुनियादी सुविधाओं के अभाव और पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जा रहे मानवाधिकार उल्लंघनों के विरोध में उपजा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस्लामाबाद सरकार पीओके के प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन कर रही है, जबकि वहां की जनता को मूलभूत अधिकारों से भी वंचित रखा जा रहा है। ऐतिहासिक रूप से पुंछ और मेंढर क्षेत्र से जुड़े परिवारों के बीच खिंची इस कृत्रिम सीमा रेखा के कारण सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोग दशकों से मानवीय त्रासदियों का सामना करने को विवश हैं।
प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों और सीमा पार आवागमन के पारंपरिक रास्तों को फिर से खोलने पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो यह आंदोलन संपूर्ण पीओके में और अधिक व्यापक रूप धारण कर लेगा। जेकेजेएएसी के नेताओं ने स्पष्ट कहा कि अब पीओके की जनता पाकिस्तानी हुकूमत के दोहरे रवैये और अत्याचारों को और अधिक सहन करने के लिए तैयार नहीं है। इस जनसभा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान द्वारा पीओके में चलाए जा रहे अवैध शासन और वहां की जनता के वास्तविक असंतोष को उजागर कर दिया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय और सुरक्षा विशेषज्ञ पीओके में तेजी से बदल रहे इन हालात और वहां पनप रहे जनविद्रोह पर निरंतर पैनी दृष्टि बनाए हुए हैं। भारतीय पक्ष का हमेशा से यह स्पष्ट और आधिकारिक रुख रहा है कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग है और पीओके पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है। मंधोल गांव में हुए इस 25 हजार से अधिक लोगों के ऐतिहासिक प्रदर्शन ने यह सिद्ध कर दिया है कि पीओके के निवासी अब भारतीय मुख्यधारा और अपने बिछड़े परिजनों से जुड़ने के लिए आतुर हैं।