गणेशोत्सव के अवसर पर देश के विभिन्न भागों में श्रीगणेश की प्रतिमाओं का भव्य और अनोखा श्रृंगार देखने को मिलता है। कहीं पुष्पों से तो कहीं बहुमूल्य आभूषणों से भगवान श्रीगणेश का पूजन-अर्चन किया जाता है। इसी क्रम में गुजरात के अमरेली जिले स्थित सावरकुंडला से गणेशोत्सव का एक अत्यंत विशिष्ट और आकर्षक स्वरूप सामने आया है। यहां स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमा का श्रृंगार पारंपरिक पुष्पों या गहनों के स्थान पर भारतीय मुद्रा (करेंसी) और अमेरिकी डॉलर से किया गया है। प्रतिमा के इस अलौकिक और भव्य रूप को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंच रहे हैं।

सावरकुंडला में ‘सद्भावना ग्रुप’ द्वारा विगत दो दशकों से गणेशोत्सव का भव्य आयोजन किया जाता रहा है। इस वर्ष आयोजकों ने भगवान श्रीगणेश के श्रृंगार को विशेष रूप देने के लिए लगभग 25 लाख रुपये मूल्य के भारतीय नोटों का उपयोग किया है। इसमें 20, 50, 100, 200 और 500 रुपये के नए नोटों की सुंदर आकृतियां बनाकर प्रतिमा पर अर्पित की गई हैं। भगवान गणेश का मुकुट 500 रुपये के नोटों से तैयार किया गया है, जबकि उनके गले की माला 200 रुपये के नोटों से सुसज्जित की गई है। इसके अतिरिक्त हाथ और चरणों पर भी भारतीय मुद्रा अत्यंत कुशलता से सजाई गई है।
इस बार की सजावट में सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय रुपये के साथ-साथ अमेरिकी डॉलर का समावेश है। यह पहला अवसर है जब सावरकुंडला में गणेश प्रतिमा के श्रृंगार में विदेशी मुद्रा का उपयोग किया गया है। आयोजकों के अनुसार, इस अद्भुत सजावट की रूपरेखा लगभग एक माह पूर्व से तैयार की जा रही थी, जबकि कार्यकर्ताओं ने दो से तीन दिन की अनवरत मेहनत के पश्चात इस संपूर्ण स्वरूप को अंतिम रूप दिया। इस विशेष व्यवस्था के कारण श्रद्धालुओं के बीच यह प्रतिमा ‘लखपति और डॉलरपति गणेश’ के नाम से कौतूहल और श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है।
आयोजकों ने बताया कि नोटों से गणेश जी का श्रृंगार करने की यह परंपरा लगभग 15 वर्ष पूर्व आरंभ हुई थी, जब पहली बार 5 लाख रुपये के नोटों का प्रयोग किया गया था। समय के साथ यह धनराशि बढ़ती गई और इस वर्ष यह 25 लाख रुपये तक पहुंच गई। आयोजकों का कहना है कि इस प्रकार के श्रृंगार का मुख्य उद्देश्य केवल भव्यता का प्रदर्शन करना नहीं है, अपितु इसके माध्यम से समाज में सुख, समृद्धि और आर्थिक संपन्नता की मंगल कामना करना है। अमरेली क्षेत्र में स्थापित यह अनोखी प्रतिमा वर्तमान में जन-जन के मध्य चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।