अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी और अनियमितताओं के मामले में जांच अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने मंदिर के काउंटिंग रूम की सीसीटीवी फुटेज और दूसरे सबूतों की जांच के दौरान नकदी की कथित अनधिकृत निकासी या उसे छिपाने के 105 मामले चिन्हित किए हैं। यह संख्या एसआईटी की शुरुआती जांच में सामने आए करीब 70 मामलों से बढ़कर 105 हो गई है। सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और 25 सितंबर 2026 तक संबंधित अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर जांच की जानकारी रखी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया गया कि जांच में आरोपियों की भूमिका तय करने के लिए सीसीटीवी फुटेज का बड़े स्तर पर विश्लेषण किया गया। इसके साथ ही बरामदगी, फोरेंसिक जांच, गवाहों के बयान, बैंक रिकॉर्ड और ऑडिट से जुड़े दस्तावेजों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया। अदालत ने निर्देश दिया कि चार्जशीट 25 सितंबर तक संबंधित अतिरिक्त सत्र न्यायालय में दाखिल की जाए और उसकी एक प्रति सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी रखी जाए।
एसआईटी की जांच में सामने आया है कि मंदिर के तीर्थयात्री सुविधा केंद्र स्थित काउंटिंग रूम में नकदी की गिनती के दौरान कथित तौर पर कई बार रुपये अलग किए गए या छिपाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक इन घटनाओं में गिनती प्रक्रिया से जुड़े कुछ अन्य लोगों की सहायता भी सामने आई है। शुरुआती जांच में 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में करीब 70 संदिग्ध घटनाओं का पता चला था, लेकिन आगे की विस्तृत जांच और अन्य डिजिटल एवं वित्तीय सबूतों के विश्लेषण के बाद यह संख्या 105 तक पहुंच गई।
इस मामले में जांच का दायरा केवल सीसीटीवी फुटेज तक सीमित नहीं रहा। एसआईटी ने आरोपियों से जुड़े बैंक खातों, संपत्तियों, मोबाइल फोन के डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेजों और बरामद रकम की भी जांच की। अदालत को बताया गया कि जांच में प्रत्येक आरोपी की भूमिका उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर तय करने की कोशिश की गई है। जांच एजेंसी ने 173 गवाहों के बयान भी दर्ज किए हैं, जिनमें ट्रस्ट के अधिकारी, चढ़ावे की गिनती से जुड़े कर्मचारी, बैंक अधिकारी, सुरक्षा कर्मचारी, सीसीटीवी ऑपरेटर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और अन्य संबंधित लोग शामिल हैं।
इस मामले में आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकूल मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं। जून के अंत में इन सभी को गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान करीब 79.85 लाख रुपये की नकदी बरामद होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित न्यायिक प्रक्रिया में ही तय होंगे।
जांच में मंदिर की चढ़ावे की व्यवस्था से जुड़ी सुरक्षा और निगरानी प्रणाली पर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया के मुताबिक नकदी की गिनती के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की तलाशी और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग से जुड़ी व्यवस्थाओं में कमियां पाई गईं। शुरुआती एसआईटी जांच में यह भी सामने आया था कि सीसीटीवी फुटेज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी और काउंटिंग रूम में प्रवेश तथा बाहर निकलने के दौरान तलाशी की प्रक्रिया प्रभावी तरीके से लागू नहीं थी।
कीमती चढ़ावे की जांच के संबंध में एसआईटी ने कुछ महत्वपूर्ण चीजों का भी सत्यापन किया है। सुप्रीम कोर्ट में रखी गई रिपोर्ट के मुताबिक 200 किलोग्राम और 38.288 किलोग्राम चांदी की ईंटों, चांदी के हार, चरण पादुका और रामचरितमानस की एक प्रति से संबंधित आरोपों की जांच की गई और इन वस्तुओं के प्रबंधन में कोई विसंगति नहीं पाई गई। इसके अलावा करीब 944.411 किलोग्राम सफेद धातु, जिसे चांदी माना गया, को पिघलाने के लिए सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड भेजे जाने से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की गई।
मामला सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में भी बदलाव किए गए। विवाद के बीच ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पद छोड़े। इसके बाद ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव करते हुए सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया। इस बदलाव का उद्देश्य ट्रस्ट के प्रशासन और मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में कदम के तौर पर बताया गया है।
अब इस मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम चार्जशीट दाखिल होना है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि पहली गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे होने की समयसीमा 25 सितंबर को समाप्त हो रही है और उससे पहले चार्जशीट दाखिल की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने भी चार्जशीट को संबंधित अदालत में पेश करने और उसकी प्रति अपने समक्ष रखने का निर्देश दिया है। इसके बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया निचली अदालत में चलेगी, जबकि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच से जुड़े पहलुओं पर भी आगे सुनवाई होगी।