पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 6 अक्टूबर को होने वाले इस उपचुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट पूरी ताकत के साथ प्रचार अभियान की तैयारी में जुटा है। पार्टी ने रेजीनगर के लिए 20 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है, जिसमें ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, महुआ मोइत्रा, कुणाल घोष और कल्याण बनर्जी जैसे प्रमुख नेताओं के नाम शामिल हैं। यह उपचुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर विभाजन और पार्टी के नाम एवं चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद चल रहा है।
रेजीनगर सीट मुर्शिदाबाद जिले में आती है और इस सीट पर उपचुनाव की जरूरत तब पड़ी, जब आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने 2026 के विधानसभा चुनाव में रेजीनगर और नाओदा दोनों सीटों से जीत हासिल करने के बाद रेजीनगर सीट छोड़ने का फैसला किया। चुनाव आयोग के नियमों के तहत एक व्यक्ति दो विधानसभा सीटों का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता, इसलिए रेजीनगर सीट खाली हुई। हुमायूं कबीर के बेटे गोलाम नबी आजाद अब इसी सीट से एजेयूपी के उम्मीदवार हैं।
ममता बनर्जी के गुट ने रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। हालांकि नामांकन के बाद उनकी ओर से नाम वापस लेने की घोषणा और फिर उसे बदलने की घटना ने चुनावी माहौल को कुछ समय के लिए और चर्चा में ला दिया। चौधरी ने बाद में स्पष्ट किया कि वह चुनाव मैदान में बने रहेंगे। इसके बाद पार्टी ने उनके समर्थन में वरिष्ठ नेताओं की प्रचार रणनीति तैयार की है।
महुआ मोइत्रा और कुणाल घोष समेत बड़े नेताओं की जिम्मेदारी
ममता गुट की ओर से जारी स्टार प्रचारकों की सूची में पार्टी के कई प्रमुख चेहरे शामिल हैं। इनमें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के अलावा सांसद महुआ मोइत्रा, नेता कुणाल घोष और कल्याण बनर्जी के नाम भी हैं। पार्टी की योजना अलग-अलग इलाकों में वरिष्ठ नेताओं की सभाओं और जनसंपर्क कार्यक्रमों के जरिए रबीउल आलम चौधरी के पक्ष में माहौल बनाने की है। हालांकि, कुणाल घोष ने अभी सभी वरिष्ठ नेताओं के रेजीनगर दौरे की निश्चित तारीखों की पुष्टि नहीं की है।
यह चुनाव टीएमसी के लिए सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं है, क्योंकि पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर भी बड़ा विवाद सामने आया है। चुनाव आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अंतरिम तौर पर अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह दिए हैं। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चुनाव चिन्ह दिया गया है, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
रेजीनगर में मुकाबले का एक और महत्वपूर्ण पहलू हुमायूं कबीर की भूमिका है। कबीर पहले तृणमूल कांग्रेस में रह चुके हैं और बाद में पार्टी से अलग होकर एजेयूपी का गठन किया। 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने रेजीनगर और नाओदा दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने रेजीनगर सीट छोड़ दी और उनके बेटे गोलाम नबी आजाद को एजेयूपी ने उम्मीदवार बनाया।
हालांकि, उपचुनाव से पहले हुमायूं कबीर को लेकर एक अलग विवाद भी सामने आया है। पुलिस ने उन्हें एक ऐसे मामले की जांच के सिलसिले में तलब किया है, जिसमें दो समुदायों के बीच तनाव पैदा करने की कथित साजिश से जुड़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है। कबीर ने इन आरोपों को साजिश बताया है और जांच में सहयोग करने की बात कही है।
इसी बीच 21 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार हुमायूं कबीर ने रेजीनगर में अपने बेटे के लिए प्रचार से दूर रहने का फैसला बताया है। उन्होंने प्रशासन की कथित कार्रवाई और अपने पार्टी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का हवाला दिया। बाद में उनके बेटे गोलाम नबी आजाद के भी प्रचार से दूर रहने की बात सामने आई। ये दावे हुमायूं कबीर की ओर से किए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग मामलों में नहीं हुई है।
रेजीनगर में 6 अक्टूबर को मतदान होगा और मतगणना 9 अक्टूबर को की जाएगी। इस चुनाव का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि यह पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद होने वाले उपचुनावों में शामिल है और इसके बीच तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक विवाद, चुनाव चिन्ह को लेकर कानूनी लड़ाई और अलग-अलग गुटों की सक्रियता सामने आ रही है। फिलहाल सभी पक्ष अपने-अपने उम्मीदवारों और संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं और अंतिम तस्वीर मतदान के बाद ही सामने आएगी।