राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के बाद अब शहरों की सरकार का अगला चरण शुरू हो गया है। सोमवार 21 सितंबर को प्रदेश के 273 नगरीय निकायों में मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए मतदान कराया जा रहा है। इनमें अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, अलवर और पाली नगर निगम के मेयर पद भी शामिल हैं। इसके अलावा 41 नगर परिषदों में सभापति और 262 नगर पालिकाओं में अध्यक्ष चुने जाएंगे। मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक होगा और इसके बाद मतगणना शुरू की जाएगी।
राजस्थान में कुल 309 नगरीय निकायों के लिए पार्षदों के चुनाव दो चरणों में 9 और 11 सितंबर को कराए गए थे। इनमें से 32 निकायों में अध्यक्ष पद का चुनाव निर्विरोध हो चुका है। बाकी 273 निकायों में आज नवनिर्वाचित पार्षद अपने निकाय के प्रमुख का चुनाव करेंगे। जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के साथ सुकेत नगर पालिका में तकनीकी कारणों से यह प्रक्रिया 25 सितंबर को होगी। वहीं, सभी निकायों में उपाध्यक्ष और उपमहापौर पद के चुनाव 22 सितंबर को कराए जाने हैं।
अजमेर में 11 निर्दलीय पार्षदों पर टिकी नजरें
अजमेर नगर निगम का मेयर चुनाव इस चरण में खास तौर पर चर्चा में है। 80 वार्ड वाले अजमेर नगर निगम में कांग्रेस के 37 पार्षद चुने गए हैं, जबकि भाजपा के खाते में 32 सीटें आई हैं। इसके अलावा 11 निर्दलीय पार्षद हैं। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के पास अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा नहीं है और निर्दलीय पार्षदों का रुख मेयर चुनाव के गणित में महत्वपूर्ण हो गया है। भाजपा की ओर से अनामिका शर्मा और कांग्रेस की ओर से किरण गढ़वाल मेयर पद की उम्मीदवार हैं।
अजमेर में चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दलों ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश की है। रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस के पार्षदों को बेंगलुरु में रखा गया था और बाद में उन्हें मतदान के लिए अजमेर लाया गया। वहीं निर्दलीय पार्षदों को लेकर दोनों दलों की गतिविधियों पर भी नजर बनी हुई है। अंतिम फैसला मतदान के दौरान पार्षदों के वोट से होगा।
उदयपुर, बीकानेर, अलवर और पाली नगर निगमों में भी मेयर पद के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। अलग-अलग निकायों में दलों के पास पार्षदों की संख्या के अनुसार समीकरण अलग हैं और कुछ स्थानों पर निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण बताई जा रही है। अप्रत्यक्ष चुनाव व्यवस्था में मेयर या अध्यक्ष का चुनाव आम मतदाता सीधे नहीं करता, बल्कि चुने हुए पार्षद मतदान के जरिए निकाय प्रमुख का चयन करते हैं।
इस बीच बीकानेर मेयर चुनाव से ठीक पहले राजस्थान हाईकोर्ट में हुई देर रात की सुनवाई भी चर्चा में है। बीकानेर नगर निगम के वार्ड-18 से नवनिर्वाचित पार्षद मकसूद अहमद की गिरफ्तारी पर अदालत ने अंतरिम रोक लगाई है। इसके अलावा हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों समेत कुछ अन्य मामलों में भी हाईकोर्ट ने चुनाव से पहले गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया। अदालत की कार्यवाही उन याचिकाओं पर हुई, जिनमें पार्षदों और उम्मीदवारों ने चुनाव के दौरान गिरफ्तारी की आशंका जताई थी।
राज्य के 10,244 वार्डों के चुनाव में भाजपा ने 4,182 सीटें, कांग्रेस ने 3,619 सीटें और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 2,273 सीटें जीती थीं। बाकी सीटों पर अन्य दलों के उम्मीदवार विजयी रहे। हालांकि, वार्ड चुनाव में मिले आंकड़े और आज होने वाले मेयर या अध्यक्ष चुनाव के नतीजे एक ही बात नहीं हैं, क्योंकि इन पदों का चुनाव निर्वाचित पार्षद करते हैं।
आज होने वाले चुनाव के बाद राजस्थान के इन 273 नगरीय निकायों में स्थानीय सरकारों का नेतृत्व तय हो जाएगा। मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना की जाएगी और संबंधित निकायों के परिणाम सामने आएंगे। इसके बाद 22 सितंबर को उपाध्यक्ष और उपमहापौर पदों के चुनाव होंगे, जबकि जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे तीन बड़े नगर निगमों के मेयर चुनाव 25 सितंबर को होने हैं।