रूस में 18 से 20 सितंबर 2026 तक संसदीय चुनाव हुए, लेकिन इस बार चुनाव सिर्फ रूस की अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त सीमाओं तक सीमित नहीं रहे। मॉस्को ने यूक्रेन के उन इलाकों में भी मतदान कराया, जिन पर रूस ने कब्जा कर रखा है और जिन्हें 2022 में रूस ने अपने क्षेत्र में शामिल करने का दावा किया था। डोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया के रूसी नियंत्रण वाले हिस्सों में भी रूसी संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा के लिए वोट डाले गए। इन क्षेत्रों को रूस अपना हिस्सा बताता है, लेकिन यूक्रेन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बड़े हिस्से ने इस विलय को मान्यता नहीं दी है।
रूस का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2026 का संसदीय चुनाव यूक्रेन पर फरवरी 2022 में शुरू हुए पूर्ण पैमाने के सैन्य अभियान के बाद पहला राष्ट्रीय संसदीय चुनाव है। रूस की 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा के लिए मतदान तीन दिनों तक चला। रूसी अधिकारियों के अनुसार, कब्जे वाले चार यूक्रेनी क्षेत्रों में 35 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। इन क्षेत्रों में मतदान सामान्य रूसी इलाकों से पहले शुरू कर दिया गया था और अधिकारियों ने इसके लिए सुरक्षा कारणों का हवाला दिया।
कब्जे वाले इलाकों में कैसे हुआ मतदान?
इन इलाकों में मतदान को लेकर सबसे ज्यादा विवाद सुरक्षा व्यवस्था और लोगों पर कथित दबाव को लेकर है। कुछ तस्वीरों और वीडियो में रूसी नियंत्रण वाले डोनेत्स्क क्षेत्र के मतदान केंद्रों पर मतदाताओं के पास हथियारबंद सैनिक दिखाई दिए। यूक्रेनी अधिकारियों और मानवाधिकार समूहों ने आरोप लगाया कि कब्जे वाले इलाकों में लोगों को वोट डालने के लिए दबाव का सामना करना पड़ा। डोनबास एसओएस से जुड़ी कार्यकर्ता वियोलेटा आर्टेमचुक ने दावा किया कि स्थानीय चुनाव अधिकारियों के सदस्य रूसी सैनिकों और सुरक्षा एजेंसियों के साथ घर-घर जाकर लोगों को मतदान के लिए मजबूर कर रहे थे। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सभी मामलों में नहीं हुई है।
यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने रूस द्वारा इन क्षेत्रों में कराए जा रहे मतदान को अवैध बताया और दूसरे देशों तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों से चुनाव और उसके नतीजों को मान्यता नहीं देने की अपील की। यूक्रेन का कहना है कि डोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया उसके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त क्षेत्र हैं और रूस को वहां चुनाव कराने का अधिकार नहीं है। यूक्रेन ने यह भी कहा कि इन क्षेत्रों से निर्वाचित प्रतिनिधियों को रूसी संसद में शामिल करना रूस की क्षेत्रीय दावेदारी को वैध बनाने की कोशिश का हिस्सा है।
रूस की तरफ से इसका बिल्कुल अलग पक्ष रखा गया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चुनाव से पहले इन क्षेत्रों में मतदान को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि वहां के निवासी पहली बार रूस की स्टेट ड्यूमा के लिए मतदान कर रहे हैं। मॉस्को इन क्षेत्रों को 2022 में रूस में शामिल किए गए ‘नए क्षेत्रों’ के रूप में पेश करता है। हालांकि, रूस द्वारा सितंबर 2022 में किए गए विलय की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक मान्यता नहीं मिली है और चारों क्षेत्रों पर रूस का पूर्ण नियंत्रण भी नहीं है।
चुनाव में पुतिन की पार्टी का दबदबा
रूस के भीतर भी यह चुनाव राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर सवालों के बीच हुआ। सत्तारूढ़ यूनाइटेड रशिया पार्टी राष्ट्रपति पुतिन के राजनीतिक तंत्र की प्रमुख पार्टी है और शुरुआती नतीजों में उसने स्पष्ट बढ़त बनाई। शुरुआती आधिकारिक आंकड़ों में पार्टी को पार्टी-लिस्ट वोट में करीब 58 फीसदी समर्थन मिला था, जबकि कई एकल-सदस्यीय सीटों पर भी उसके उम्मीदवार आगे चल रहे थे।
इस चुनाव में युद्ध का विरोध करने वाली राजनीतिक ताकतों की भागीदारी सीमित रही। रूस की याब्लोको पार्टी, जिसे देश की प्रमुख खुले तौर पर युद्ध-विरोधी पार्टियों में गिना जाता है, को राष्ट्रीय पार्टी सूची से बाहर कर दिया गया। यूरोपीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने भी रूस में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और स्वतंत्र निगरानी को लेकर सवाल उठाए हैं।
रूस में मतदान खत्म होने के बाद शुरुआती आंकड़ों में यूनाइटेड रशिया सबसे आगे रही। हालांकि अंतिम परिणामों की प्रक्रिया पूरी होने से पहले शुरुआती आंकड़ों को अंतिम राजनीतिक तस्वीर नहीं माना जा सकता। चुनाव के दौरान रूसी अधिकारियों ने इलेक्ट्रॉनिक मतदान व्यवस्था और संचार ढांचे पर साइबर हमलों के दावे भी किए, जबकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित रही।
यूक्रेन के कब्जे वाले इलाकों में मतदान का मुद्दा अब रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय संप्रभुता की बहस से भी जुड़ गया है। रूस इसे अपने प्रशासनिक ढांचे में शामिल क्षेत्रों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि यूक्रेन और उसके समर्थक इसे कब्जे वाले क्षेत्र में कराई गई ऐसी प्रक्रिया मानते हैं जिसे मान्यता नहीं दी जानी चाहिए। इसी वजह से 2026 का रूसी संसदीय चुनाव केवल घरेलू राजनीतिक घटना नहीं रहा, बल्कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के व्यापक राजनीतिक और कूटनीतिक विवाद का भी हिस्सा बन गया है।