गणेश चतुर्थी के दौरान देशभर में भगवान गणेश के पंडालों को अलग-अलग थीम और आकर्षक सजावट से सजाया जाता है। कहीं फूलों और मालाओं से गणपति का श्रृंगार होता है तो कहीं भव्य रोशनी और अलग-अलग कलाकृतियों के जरिए पंडाल को खास बनाया जाता है। लेकिन तेलंगाना के पालवंचा में इस बार गणेश उत्सव के दौरान ऐसी सजावट देखने को मिली, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यहां दो अलग-अलग गणेश प्रतिमाओं को फूलों या सामान्य सजावटी सामान के बजाय करोड़ों रुपये के असली करेंसी नोटों से सजाया गया। दोनों पंडालों में इस्तेमाल किए गए नोटों की कुल कीमत करीब 2 करोड़ 90 लाख रुपये बताई गई है।
यह मामला तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले के पालवंचा शहर का है। यहां गणेश चतुर्थी के मौके पर अलग-अलग स्थानों पर स्थापित की गई दो गणेश प्रतिमाएं अपनी अनोखी सजावट के कारण आकर्षण का केंद्र बन गईं। पहली गणेश प्रतिमा की सजावट में करीब 1 करोड़ 40 लाख रुपये के करेंसी नोट लगाए गए। इस आयोजन में कापू समुदाय से जुड़े लोगों की भागीदारी रही। पंडाल में भगवान गणेश की प्रतिमा के आसपास नोटों को सजावटी तरीके से लगाया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
वहीं पालवंचा में दूसरी गणेश प्रतिमा को टीम एकदंता नाम के युवा संगठन की ओर से सजाया गया। इस पंडाल में करीब 1 करोड़ 50 लाख रुपये के करेंसी नोटों का इस्तेमाल किया गया। इस तरह दोनों गणेश प्रतिमाओं की सजावट में इस्तेमाल की गई रकम को जोड़ने पर कुल राशि 2 करोड़ 90 लाख रुपये पहुंचती है। नोटों से की गई इस भव्य सजावट के चलते दोनों पंडाल स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बन गए।
स्थानीय कारोबारियों ने दिया सहयोग, बैंकों से मिले नए नोट
इतनी बड़ी संख्या में करेंसी नोटों को सजावट के लिए जुटाना अपने आप में बड़ा सवाल था। आयोजकों के मुताबिक, इस आयोजन के लिए स्थानीय कारोबारियों ने आर्थिक सहयोग दिया। कई कारोबारियों ने मिलकर उत्सव की भव्य सजावट के लिए योगदान किया। इसके बाद बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से सजावट के लिए नए करेंसी नोट उपलब्ध कराए गए। आयोजकों ने बताया कि बैंकों की मदद से नए नोट हासिल किए गए और उन्हें पंडाल की सजावट में इस्तेमाल किया गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, सजावट में अलग-अलग मूल्यवर्ग के नोटों का इस्तेमाल किया गया। नोटों को केवल एक जगह इकट्ठा करने के बजाय उन्हें फूलों, मालाओं और दूसरी सजावटी आकृतियों की तरह व्यवस्थित किया गया, जिससे पूरी सजावट देखने में बेहद अलग नजर आई। एक पंडाल में करेंसी नोटों से तैयार माला और मुकुट जैसी सजावटी संरचनाएं भी आकर्षण का हिस्सा बनीं।
गणेश प्रतिमाओं को देखने के लिए पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। आमतौर पर गणेश उत्सव में भक्त भगवान गणेश के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पंडालों में पहुंचते हैं, लेकिन इस बार पालवंचा में करोड़ों रुपये के नोटों से तैयार सजावट भी लोगों के आकर्षण का बड़ा कारण बनी। सोशल मीडिया और समाचार रिपोर्टों के जरिए जब इस अनोखे आयोजन की जानकारी सामने आई तो इसे लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई।
पालवंचा में नोटों से गणेश प्रतिमा सजाने का यह चलन नया नहीं है। इससे पहले भी शहर में गणेश उत्सव के दौरान करेंसी नोटों से पंडाल और प्रतिमा सजाने के आयोजन सामने आते रहे हैं। वर्ष 2023 में एक गणेश पंडाल में करीब 1 करोड़ रुपये के नोटों से सजावट किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसके बाद 2024 में कापू संघम गणेश उत्सव समिति की ओर से अंबेडकर सेंटर में करीब 1 करोड़ 10 लाख रुपये के नए नोटों से गणेश प्रतिमा और मंडप सजाया गया था। उस दौरान 500, 200 और 100 रुपये के नोटों को फूलों के डिजाइन में सजाया गया था और गणपति की प्रतिमा पर नोटों की बड़ी माला भी लगाई गई थी।
इस साल की खास बात यह रही कि पालवंचा में दो अलग-अलग गणेश प्रतिमाओं की सजावट में इस्तेमाल किए गए नोटों की संयुक्त कीमत करीब 2 करोड़ 90 लाख रुपये रही। एक पंडाल में 1.40 करोड़ रुपये और दूसरे में 1.50 करोड़ रुपये के नोट इस्तेमाल किए गए। इसी वजह से इस बार का गणेश उत्सव पहले के आयोजनों की तुलना में और ज्यादा चर्चा में आ गया है।
गणेश उत्सव के दौरान धार्मिक आस्था के साथ भव्यता और रचनात्मकता भी देखने को मिलती है। पालवंचा का यह आयोजन इसी का एक अलग उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां आयोजकों ने स्थानीय लोगों और कारोबारियों के सहयोग से बड़े स्तर पर उत्सव मनाने की तैयारी की। करोड़ों रुपये के नोटों से की गई सजावट ने इन पंडालों को लोगों के लिए विशेष आकर्षण बना दिया और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के साथ इस अनोखी सजावट को देखने के लिए पहुंचे।