प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के नेतृत्व ने भारतीय जनता पार्टी को एक कैडर-आधारित दल से बदलकर चुनावी जीत की सर्वव्यापी शक्ति में तब्दील कर दिया है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और लाभार्थी वर्ग के नए सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले के दम पर बीजेपी ने पारंपरिक जातिगत समीकरणों को ध्वस्त कर 21 राज्यों तक अपना परचम फहराया है।
नरेंद्र मोदी ने अपने जीवन के 75 साल का सफर तय कर लिया है। गुजरात के एक साधारण परिवार में जन्मे मोदी लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता में हैं। 1987 में अहमदाबाद नगर निगम का चुनाव जिताने की जिम्मेदारी से शुरू हुआ उनका सफर आज ‘मोदी युग’ के नाम से जाना जाता है। बूथ कार्यकर्ता से लेकर प्रधानमंत्री तक का यह सफर देश की राजनीति के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदलकर रख गया।
मोदी युग में बीजेपी न केवल सत्ता के शीर्ष पर लगातार बनी हुई है, बल्कि उसने अपने वैचारिक एजेंडे, संगठन संरचना और चुनावी रणनीति में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। पिछले 12 सालों में पार्टी के काम करने का पूरा रंग-ढंग बदल चुका है और अब उसे जीत के सिवाय कुछ मंजूर नहीं।
जातीय पैटर्न कैसे टूटा?
प्रधानमंत्री मोदी पारंपरिक राजनीति से अलग हटकर अपनी सियासी लकीर खींचते हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने गुजरात में बीजेपी की जड़ें इतनी मजबूत कीं कि कांग्रेस दोबारा खड़ी नहीं हो पाई। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने उसी प्रशासनिक और रणनीतिक क्षमता का विस्तार किया। जमीन से जुड़े रहने, चुनावी वादों को अमलीजामा पहनाने और नैरेटिव सेट करने की उनकी कला ने पार्टी को सफलता के शिखर पर पहुंचाया।
बीजेपी को ‘ब्राह्मण और बनिया’ वाली छवि से बाहर निकालकर दलित, ओबीसी और आदिवासी वोटरों को जोड़ने का काम नरेंद्र मोदी ने किया। खुद ओबीसी समाज से आने वाले मोदी ने विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं (लाभार्थी वर्ग) को मुख्य एजेंडा बनाया। इसी के बल पर वे जातिवादी राजनीति को काउंटर करने में सफल रहे। अमित शाह ने एक बार कहा था कि बीजेपी की यह जीत भारत में जातिवादी राजनीति के अंत की घोषणा है।
हिंदुत्व-राष्ट्रवाद का एजेंडा
प्रधानमंत्री बनने के बाद बीजेपी के हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के एजेंडे को जबर्दस्त धार मिली। अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन से लेकर प्राण-प्रतिष्ठा तक मोदी की मौजूदगी बड़ा सियासी संदेश थी। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना, राज्य का पुनर्गठन, ट्रिपल तलाक खत्म करना और राम मंदिर निर्माण मोदी सरकार के मुख्य वैचारिक एजेंडे का हिस्सा रहे।
राष्ट्रवाद का एक प्रमुख पहलू ‘जीरो टॉलरेंस ऑन टेररिज्म’ रहा। उरी और बालाकोट के बाद सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक तथा आतंकवाद के खिलाफ सख्त अभियानों ने इसे नई परिभाषा दी। पीएम मोदी अक्सर कहते हैं कि ‘राष्ट्र प्रथम’ उनका संकल्प है।
सियासी कारवां कैसे बढ़ा?
2014 में जब मोदी के नेतृत्व में भाजपा केंद्र की सत्ता में आई, तब कई राज्यों में उसकी अपनी सरकारें नहीं थीं। कांग्रेस और क्षेत्रीय दल मजबूत थे। पिछले 12 सालों में बीजेपी ने भौगोलिक और संगठनात्मक विस्तार का सबसे बड़ा बदलाव दिखाया। आज पार्टी 21 राज्यों तक अपना प्रभाव बढ़ा चुकी है।
2014 के चुनाव से पहले मोदी को चुनाव प्रचार समिति की कमान सौंपी गई तो उन्होंने अभियान को हाईटेक बनाया। 2014 से पहले ज्यादातर दल अल्पसंख्यक वोट बैंक पर फोकस करते थे। मोदी ने नया सियासी ढर्रा चलाया, जिसके चलते विपक्ष को भी अपनी शैली बदलनी पड़ी।
मोदी की यह नई राजनीति बीजेपी को न सिर्फ सफलता के शिखर पर ले गई, बल्कि खुद उन्हें लगातार आगे बढ़ाती रही।