मध्य प्रदेश में STF ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट बनवाने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जांच में ऐसा खुलासा हुआ है जिसने पासपोर्ट और पुलिस वेरिफिकेशन सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डबरा की एक ही कॉलोनी के एक पते का इस्तेमाल कर 17 फर्जी पासपोर्ट बनवाए गए। इसके अलावा भोपाल के अन्ना नगर क्षेत्र के एक बौद्ध मठ के पते पर भी STF ने 40 फर्जी पासपोर्ट पकड़े। इस तरह कुल 70 फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने की बात सामने आई है।
STF को इन पासपोर्ट के इस्तेमाल से विदेश यात्राओं के सबूत भी मिले हैं। जांच में सामने आया है कि कुछ संदिग्धों ने इन्हीं पासपोर्ट के जरिए थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान तक की यात्रा की। अब STF ये पता लगाने में जुटी है कि इन यात्राओं के पीछे सिर्फ व्यक्तिगत फायदे थे या इस नेटवर्क का कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी है।
पहले फर्जी पहचान, फिर पासपोर्ट
STF की जांच के मुताबिक गिरोह का तरीका बेहद व्यवस्थित था। पहले लोगों के लिए आधार कार्ड, PAN कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज तैयार किए जाते थे। इसके बाद इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पुलिस वेरिफिकेशन कराया जाता और फिर पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया पूरी की जाती।
मास्टरमाइंड समेत दो गिरफ्तार
STF ने मामले में दो आरोपियों को महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया है। उनकी पहचान प्रियान रॉय और जॉय चौधरी के रूप में हुई है। इस पूरे मामले ने पुलिस वेरिफिकेशन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब एक ही पते पर 17 से ज्यादा पासपोर्ट तैयार हो गए तो वेरिफिकेशन के दौरान ये बात सामने क्यों नहीं आई? फर्जी दस्तावेज पुलिस रिकॉर्ड में कैसे स्वीकार हुए? पासपोर्ट जारी होने से पहले दस्तावेजों की जांच में ये फर्जीवाड़ा क्यों नहीं पकड़ा गया? अब STF इन सवालों के जवाब तलाश रही है।
2021-22 से चल रहा था नेटवर्क
STF के मुताबिक ये नेटवर्क 2021-22 से डबरा में सक्रिय होने की बात सामने आई है। इसका मतलब है कि फर्जी दस्तावेजों और पासपोर्ट का खेल लंबे समय तक चलता रहा। अब STF ये पता लगाने में जुटी है कि इस दौरान नेटवर्क ने कितने लोगों के लिए फर्जी पहचान और पासपोर्ट तैयार कराए। साथ ही उन लोगों की भी पहचान की जा रही है जिन्होंने इन पासपोर्ट का इस्तेमाल कर विदेश यात्राएं कीं।