पहलगाम हमले को एक वर्ष, यादें अब भी ताजा
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले को एक वर्ष पूरा हो गया है। हालांकि समय बीत गया है, लेकिन पीड़ित परिवारों का दर्द आज भी कम नहीं हुआ। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
हमले से पहले सामान्य थे हालात
हमले से पहले पहलगाम और बैसरन घाटी में माहौल सामान्य था। पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंच रहे थे। होटल और कैफे भरे रहते थे। लोगों को किसी खतरे का अंदेशा नहीं था।
अचानक बदल गया माहौल
लेकिन एक महीने बाद हालात पूरी तरह बदल गए। आतंकवादियों ने 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी। लोगों की पहचान कर उन्हें नजदीक से गोली मारी गई। इस घटना ने घाटी में भय और सन्नाटा फैला दिया।
पर्यटन पर पड़ा बड़ा असर
इसके बाद पर्यटन पर गहरा असर पड़ा। पहले जहां होटल भरे रहते थे, वहीं बाद में खाली नजर आने लगे। कई लोगों की आजीविका प्रभावित हुई। खासकर वाहन चालकों और छोटे व्यापारियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा।
धीरे-धीरे लौट रही है सामान्य स्थिति
हालांकि अब हालात धीरे-धीरे सुधर रहे हैं। पर्यटकों की संख्या फिर से बढ़ने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब पहले के मुकाबले लगभग आधे पर्यटक लौट आए हैं। इससे लोगों को कुछ राहत मिली है।
लोगों के मन में अब भी डर और भावनाएं
वहीं, स्थानीय लोगों के मन में अब भी डर बना हुआ है। जब उनसे स्थिति के बारे में पूछा जाता है, तो वे या तो चुप रहते हैं या फिर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं। यह दिखाता है कि घटना का असर अभी भी गहरा है।
सुरक्षा व्यवस्था अब भी सख्त
इस बीच सुरक्षा व्यवस्था कड़ी बनी हुई है। पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
उम्मीद फिर लौट रही है
इसके बावजूद कश्मीर में उम्मीद फिर लौटती दिख रही है। एक ओर स्थानीय लोग अपने जीवन को फिर से पटरी पर ला रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पर्यटक भी घाटी की ओर रुख कर रहे हैं।
पर्यटन बना सामान्य स्थिति का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटन यहां सामान्य स्थिति का संकेत होता है। जैसे-जैसे पर्यटक बढ़ते हैं, वैसे-वैसे हालात बेहतर माने जाते हैं।