बिहार की राजनीति में एक बार फिर परिवारवाद और राजनीतिक उत्तराधिकार को लेकर बहस तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजप्रताप यादव के बाद अब जनता दल यूनाइटेड प्रमुख नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की भी सत्ता में एंट्री हो गई है। बिहार सरकार के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार में निशांत कुमार को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
पटना के गांधी मैदान में हुए शपथ ग्रहण समारोह में कुल 32 मंत्रियों ने शपथ ली। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कई बड़े एनडीए नेता मौजूद रहे। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विभागों का बंटवारा किया गया, जिसमें निशांत कुमार को स्वास्थ्य मंत्रालय सौंपा गया।
राजनीतिक गलियारों में अब इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि बिहार की राजनीति में “नेतापुत्र मॉडल” फिर मजबूत हो रहा है। इससे पहले तेजप्रताप यादव भी स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। अब निशांत कुमार को वही विभाग मिलने के बाद विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक कई सवाल उठा रहे हैं।
निशांत कुमार लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहे थे। हालांकि पिछले कुछ महीनों में उनकी सार्वजनिक सक्रियता बढ़ी और अब उन्हें सीधे कैबिनेट में जगह मिल गई। इसे जेडीयू में नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
🏛 बिहार कैबिनेट विस्तार में बड़ा संदेश
सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में बीजेपी को सबसे ज्यादा मंत्री पद मिले। वहीं जेडीयू के खाते में भी कई अहम विभाग आए।
⚕️ निशांत कुमार को मिला स्वास्थ्य मंत्रालय
विभागों के बंटवारे में निशांत कुमार को स्वास्थ्य मंत्रालय सौंपा गया। इससे पहले तेजप्रताप यादव भी इसी विभाग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
📌 परिवारवाद पर फिर शुरू हुई बहस
विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार की राजनीति में अब नई पीढ़ी को आगे लाने का दौर चल रहा है। हालांकि आलोचक इसे परिवारवाद का नया अध्याय भी बता रहे हैं।
🗳 भविष्य की राजनीति से जोड़कर देखे जा रहे संकेत
निशांत कुमार की एंट्री को केवल मंत्री पद तक सीमित नहीं माना जा रहा। इसे जेडीयू के भविष्य और बिहार की आगामी राजनीति के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।