महाराष्ट्र के नासिक में धर्मांतरण और पहचान छिपाने के मामले में पुलिस जांच तेज हो गई है। अब इस मामले में एआईएमआईएम पार्षद अब्दुल मतीन का नाम सामने आने के बाद सियासी हलचल भी बढ़ गई है। पुलिस को शक है कि फरार चल रही निदा खान को करीब 25 दिनों तक छिपाने में उसकी मदद की गई।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, निदा खान लंबे समय से पुलिस की नजर से बचती रही। इसी दौरान उसके कई ठिकानों की जानकारी जुटाई गई। पुलिस को मिले इनपुट के आधार पर अब एआईएमआईएम पार्षद अब्दुल मतीन से पूछताछ की जा रही है।
बताया जा रहा है कि यह मामला नासिक की एक निजी कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि पहचान छिपाकर संपर्क बढ़ाया गया और बाद में धर्मांतरण से जुड़े विवाद सामने आए। पुलिस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
🕵️ पुलिस जांच में क्या सामने आया
पुलिस के अनुसार, निदा खान को कई दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर छिपाकर रखा गया। जांच में अब उन लोगों की भूमिका खंगाली जा रही है जिन्होंने उसे मदद पहुंचाई।
⚖️ AIMIM पार्षद पर बढ़ी मुश्किलें
एआईएमआईएम पार्षद अब्दुल मतीन पर फरार आरोपी की मदद करने का आरोप लगा है। पुलिस उससे लगातार पूछताछ कर रही है और कई डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
📌 धर्मांतरण मामले ने बढ़ाई सियासी हलचल
मामले के तूल पकड़ने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। विपक्ष इसे कानून-व्यवस्था से जोड़कर सरकार को घेर रहा है।