🗣️ होसबले का बयान चर्चा में
दत्तात्रेय होसबले ने कहा है कि नरेंद्र मोदी अपने अनूठे अंदाज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मूल्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री संघ के “सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि” हैं।
🌱 ‘एक पेड़ मां के नाम’ का जिक्र
होसबले ने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहल के जरिए पर्यावरण और समाज के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि संघ भी इसी तरह के मूल्यों पर काम करता रहा है।
📌 अगले 25 वर्षों की प्राथमिकताएं तय
आरएसएस ने आने वाले 25 वर्षों के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही है। इनमें सामाजिक सद्भाव, आत्म-जागरूकता, औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति, नागरिक भावना को बढ़ावा देना, पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करना और सतत विकास शामिल हैं।
🇮🇳 सरकारी योजनाओं में दिखता है प्रभाव
होसबले ने कहा कि सरकार की कई योजनाएं संघ की सोच को दर्शाती हैं। उन्होंने ‘आत्मनिर्भर भारत’ और प्रधानमंत्री के ‘पंच प्राण’ जैसे संकल्पों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पहल उसी दिशा में काम कर रही हैं।
📜 सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े हैं मोदी
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री एक लोकतांत्रिक देश के निर्वाचित नेता होने के बावजूद अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं और संघ के सिद्धांतों को अच्छी तरह समझते हैं।
🤝 भाजपा-आरएसएस संबंध पर भी बोले
होसबले ने याद दिलाया कि जब भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ था, तब से ही उसका संघ के साथ करीबी संबंध रहा है। उनके मुताबिक, यह संबंध समय के साथ और मजबूत हुआ है।
👉 कुल मिलाकर, होसबले के इस बयान ने एक बार फिर राजनीति और वैचारिक संगठनों के संबंधों पर बहस को तेज कर दिया है।