बिहार के कटिहार जिले से एक बेहद प्रेरणादायक और सुखद तस्वीर सामने आई है, जिसने प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति आम जनता की सोच में एक सकारात्मक बदलाव ला दिया है. आमतौर पर किसी भी स्कूल में जिला मजिस्ट्रेट (DM) के पहुंचने पर शिक्षकों और प्रशासनिक अमले में औपचारिकता और हड़कंप की स्थिति बन जाती है. रजिस्टर खंगाले जाते हैं और कक्षाओं में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की होड़ मच जाती है. परंतु कटिहार के जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने कोढ़ा प्रखंड के रौतारा मिडिल स्कूल के अपने औचक निरीक्षण के दौरान इन सभी पारंपरिक दायरों को तोड़कर एक अनूठी मिसाल पेश की है. उनके इस सरल और संवेदनशील अंदाज ने न केवल स्कूली बच्चों का दिल जीत लिया, बल्कि आत्मनिर्भरता का एक बड़ा संदेश भी समाज को दिया है.
निरीक्षण के दौरान जब डीएम आशुतोष द्विवेदी रौतारा मिडिल स्कूल के क्लासरूम में दाखिल हुए, तो उन्होंने केवल फाइलों की जांच तक खुद को सीमित नहीं रखा. वे सीधे बच्चों के बीच पहुंच गए और एक शिक्षक की भूमिका निभाते हुए बच्चों से पढ़ाई से जुड़े सवाल किए. शुरुआत में बच्चों के लिए यह किसी सपने जैसा था कि उनके सामने जिले के डीएम साहब खड़े हैं. हालांकि, डीएम के सहज और मिलनसार स्वभाव के कारण बच्चों का झिझकन दूर हो गया और उन्होंने उत्साह के साथ उनके सवालों के जवाब देने शुरू कर दिए.
क्लासरूम का जायजा लेने के बाद जब बच्चों से बातचीत चल रही थी, तभी स्कूल में दोपहर के भोजन यानी मिड-डे मील की घंटी बज गई. आमतौर पर वीआईपी दौरों के लिए अलग से व्यवस्थाएं की जाती हैं, लेकिन आशुतोष द्विवेदी ने सभी औपचारिकताओं को दरकिनार कर दिया. वे बिना किसी संकोच के सीधे बच्चों के पास पहुंचे और उनके साथ फर्श पर जमीन पर ही पालथी मारकर बैठ गए. उन्होंने बच्चों की थाली से मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को परखा और उन्हीं के साथ बड़े चाव से मिड-डे मील का आनंद लिया.
भोजन के दौरान डीएम ने बच्चों से उनकी पढ़ाई, घर-परिवार और स्कूल की सुविधाओं को लेकर अनौपचारिक चर्चा की. बच्चों के लिए यह अनुभव अत्यंत रोमांचक और यादगार बन गया, क्योंकि उन्होंने पहली बार किसी प्रशासनिक मुखिया को इतने करीब और अपने बीच जमीन पर बैठकर खाते देखा था. बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी और वे डीएम साहब से बेझिझक बातें कर रहे थे.
भोजन समाप्त होने के पश्चात उन्होंने जो किया, उसने इस पूरे दौरे को और अधिक खास और चर्चा का विषय बना दिया. उन्होंने अपनी थाली खुद उठाई और अन्य बच्चों की तरह नल पर जाकर अपनी थाली को अच्छी तरह धोया. इस सरल कार्य के जरिए उन्होंने यह संदेश दिया कि दुनिया में कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है.
मीडिया और स्थानीय लोगों से बातचीत करते हुए जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक जीवन के सबक सिखाना भी उतना ही आवश्यक है. उन्होंने कहा कि बच्चे हमेशा बड़ों को देखकर सीखते हैं, इसलिए यह जरूरी है कि हम उन्हें आत्मनिर्भरता (Self-reliance) का पाठ अपने आचरण से पढ़ाएं. चाहे घर हो या स्कूल, अपने छोटे-छोटे काम खुद करने की आदत बच्चों में आत्मविश्वास और जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना पैदा करती है.
कटिहार के इस सरकारी स्कूल में डीएम के इस दौरे की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. जिले के मुखिया द्वारा दिखाई गई इस प्रशासनिक संवेदनशीलता और सादगी की चहुंओर प्रशंसा हो रही है. रौतारा मिडिल स्कूल के छात्र-छात्राओं के लिए यह दिन एक अमिट याद बन गया है, क्योंकि उन्होंने प्रशासनिक पद की ऊंचाइयों को छोड़कर जमीन से जुड़े एक ऐसे अधिकारी को देखा, जिन्होंने न सिर्फ उन्हें पढ़ाया और खिलाया, बल्कि खुद अपनी थाली धोकर आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा उदाहरण पेश किया.