भारतीय संसद के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में उस समय एक अत्यंत गंभीर और राजनीतिक रूप से गर्मागरम माहौल देखने को मिला, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के प्रसिद्ध भाषण ‘Tryst with Destiny’ (नियति के साथ मिलन) के चुनिंदा अंशों को INDIA ब्लॉक के तमाम दिग्गज सांसदों के समक्ष पढ़कर सुनाया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलने जाने से पहले आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में राहुल गांधी ने देश के मौजूदा राजनीतिक हालातों, संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और विपक्ष की रणनीतिक एकजुटता पर विस्तार से अपने विचार रखे।
संसद भवन के सेंट्रल हॉल में उपस्थित विपक्षी सांसदों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने पंडित नेहरू के 15 अगस्त की मध्यरात्रि वाले ऐतिहासिक संबोधन की पंक्तियों को दोहराया। उन्होंने नेहरू के शब्दों को पढ़ते हुए कहा, “भारत, पूरे एशिया और दुनिया के लिए यह एक बहुत अहम पल है। पूरब में आज़ादी का एक नया सितारा उदय हो रहा है, एक नई उम्मीद जगी है और एक लंबे समय से संजोया गया सपना सच हो रहा है। यह सितारा कभी अस्त न हो और यह उम्मीद कभी टूटे नहीं!” राहुल गांधी ने इन पंक्तियों के माध्यम से सांसदों को यह याद दिलाने का प्रयास किया कि देश की लोकतांत्रिक बुनियाद और संविधान की रक्षा करना वर्तमान समय की सबसे बड़ी और अहम जिम्मेदारी है।
हालिया चुनावी नतीजों और कथित हेराफेरी पर गंभीर सवाल
ऐतिहासिक संदर्भ देने के पश्चात नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देश के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और विशेषकर कुछ राज्यों के चुनावी परिणामों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय के दौरान विशेष तौर पर हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में चुनावी नतीजों के जो रुझान और आंकड़े सामने आए हैं, उन पर विश्वास करना कठिन है और उन पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। राहुल ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस कथित हेराफेरी और अनियमितताओं के बारे में तब पुख्ता जानकारी मिली, जब उनके और उनकी टीम के हाथों ठोस सबूत लगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर कड़ा प्रहार करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मामला केवल एक व्यक्ति या मुख्य चुनाव आयुक्त का नहीं है, बल्कि संपूर्ण व्यवस्था को जकड़ चुकी समस्या का है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त खुद को क्या समझते हैं? उनका मुख्य और एकमात्र संवैधानिक दायित्व जनता के जनादेश और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया को सुरक्षित रखना है, न कि किसी सत्ताधारी दल के हितों की पूर्ति करना। उन्होंने जोर देकर कहा कि ज्ञानेश कुमार से भी बड़ी समस्या मौजूदा केंद्र सरकार है, और इस भ्रष्ट व्यवस्था को बदलने के लिए सरकार को सत्ता से हटाना नितांत आवश्यक हो चुका है।
‘यदि ऐसा ही दबाव बना रहा, तो गिर जाएगी सरकार’: राहुल गांधी की बड़ी हुंकार
बैठक के अंत में राहुल गांधी ने INDIA ब्लॉक के सभी सांसदों में जोश भरते हुए कहा कि यदि विपक्ष इसी प्रकार सड़क से लेकर संसद तक एकजुट होकर सरकार और चुनाव आयोग पर लगातार दबाव बनाए रखता है, तो वह दिन दूर नहीं जब यह सरकार ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगी। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों के भीतर देश भर में हुए जन-आंदोलनों और विपक्षी प्रदर्शनों ने सरकार की नींव को हिलाकर रख दिया है। इस बैठक के तुरंत पश्चात राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करने के लिए रवाना हुआ, जहां उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल बर्खास्त किए जाने की औपचारिक मांग से जुड़ा ज्ञापन सौंपा।