मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन अपने चरम पर पहुंच गया है। संगठन के संस्थापकों एवं प्रवक्ताओं अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार देश की युवा पीढ़ी यानी ‘जेन-जी’ (Gen-Z) के अभूतपूर्व आक्रोश से बुरी तरह डर गई है। CJP नेताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए जिस प्रकार सुरक्षाबलों का घेरा तैयार किया गया है और मेट्रो स्टेशनों तथा यातायात पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, वह देश में आपातकाल (Emergency) जैसे अघोषित हालात की पुष्टि करता है।
संगठन ने घोषणा की है कि पुलिस प्रशासन द्वारा अनुमति न दिए जाने के बावजूद 10 अक्टूबर को प्रातः 10:00 बजे देश भर के हजारों युवा और नागरिक जंतर-मंतर पर एकत्र होकर मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध महाप्रदर्शन करेंगे। CJP प्रवक्ता सौरव दास ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि युवाओं को जंतर-मंतर जाने से रोका गया या गिरफ्तार करने का प्रयास हुआ, तो संपूर्ण दिल्ली की सड़कें ही विरोध प्रदर्शन का केंद्र बन जाएंगी।
‘हथकंडों से नहीं डरेगी युवा पीढ़ी’: सौरव दास और अभिजीत दिपके की ललकार
मीडिया से संवाद करते हुए CJP प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया कि सरकार प्रदर्शन से पूर्व ही शीर्ष CJP नेताओं को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेने या गिरफ्तार करने की योजना बना रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवा पीढ़ी अपने संवैधानिक अधिकारों, पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया और लोकतंत्र की रक्षा हेतु पूरी तरह जागृत हो चुकी है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस को निशाने पर लेते हुए कहा कि सरकार जितने चाहे प्रतिबंध लगा ले, किंतु युवाओं के वैचारिक सैलाब को रोकने में सफल नहीं हो सकेगी।
दिल्ली में कड़े सुरक्षा इंतजाम, 38 ट्रेनें रद्द और मेट्रो गेट बंद करने की सिफारिश
10 अक्टूबर को CJP के प्रस्तावित आंदोलन और ‘INDIA’ गठबंधन के विरोध प्रदर्शनों की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गए हैं। संपूर्ण नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए रेलवे द्वारा नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों की ओर आने-जाने वाली लगभग 38 ट्रेनों को निरस्त कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियातन दिल्ली के कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वारों को नियंत्रित या बंद रखने के निर्देश दिए हैं, जिससे यात्रियों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति हेतु मामला पहुंचा सर्वोच्च न्यायालय
दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की प्रशासनिक अनुमति न मिलने का प्रकरण अब सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के समक्ष भी पहुंच गया है। अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा द्वारा दायर एक जनहित याचिका में तर्क दिया गया है कि नागरिकों और राजनीतिक संगठनों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने से रोकना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। भारत के मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने मामले पर शीघ्र सुनवाई का आश्वासन दिया है, जबकि दिल्ली पुलिस के रवैये को लेकर पूरे देश में राजनीतिक गतिरोध और अधिक उग्र रूप धारण करता जा रहा है।