निर्वाची नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के त्यागपत्र की मांग को लेकर विपक्षी दलों के ‘INDIA’ गठबंधन द्वारा आयोजित केंद्रीय विरोध प्रदर्शन से आम आदमी पार्टी (AAP) ने पूरी तरह किनारा कर लिया है। आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने औपचारिक रुख स्पष्ट करते हुए घोषणा की है कि वे गठबंधन के सामूहिक मंच या मार्च का हिस्सा बनने के बजाय स्वतंत्र रूप से अपना विरोध व्यक्त कर रहे हैं। इस निर्णय ने राजधानी के राजनीतिक गलियारों में विपक्षी एकजुटता के संदर्भ में नई बहस छेड़ दी है।
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी और ‘INDIA’ गठबंधन के घटकों के मध्य कोई चुनावी या रणनीतिक तालमेल नहीं है। उन्होंने रेखांकित किया कि AAP चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और वोट विलोपन के विषय पर पूरी दृढ़ता से मुखर है, किंतु वह अपने स्वयं के संगठनात्मक ढांचे के माध्यम से सड़कों पर उतरकर जनहित की लड़ाई लड़ रही है, न कि गठबंधन के संयुक्त झंडे के तले।
उल्लेखनीय है कि ‘INDIA’ गठबंधन के प्रमुख घटक दलों—कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), वामपंथी दलों और समाजवादी पार्टी (SP) के सांसदों एवं नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद भवन से निर्वाचन सदन तक विरोध मार्च निकालने की रूपरेखा तैयार की थी। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने और आयोग के कामकाज में पारदर्शिता के अभाव को उजागर करना है। हालांकि, AAP की अनुपस्थिति ने इस संयुक्त मोर्चा प्रदर्शन की सामूहिक धार को प्रभावित किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली और पंजाब में कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी के मध्य जारी क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा इस दूरी का मुख्य कारण है। आगामी राज्यों के चुनावों और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के दृष्टिगत आम आदमी पार्टी अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखना चाहती है। यही कारण है कि केंद्रीय मुद्दों पर विपक्षी विचारधारा से सहमति रखने के उपरांत भी पार्टी संगठनात्मक स्तर पर कांग्रेस नीत संयुक्त विरोध प्रदर्शनों से पृथक रह रही है।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने विपक्षी दलों के इस पूरे प्रदर्शन और आरोपों को तथ्यहीन एवं राजनीति से प्रेरित करार दिया है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि SIR एक संवैधानिक और नियमित प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य केवल योग्य मतदाताओं के नाम जोड़ना और दोहरे या फर्जी प्रविष्टियों को हटाना है। सत्तापक्ष के अनुसार, चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संस्था पर सवाल उठाकर और बार-बार बहिष्कार करके विपक्ष केवल अपनी संभावित पराजय की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा है।