मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और निर्वाचन सूचियों के पुनरीक्षण (SIR) में कथित धांधली के विरोध में नई दिल्ली में चल रहे ‘INDIA’ गठबंधन के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के साथ हुई तीखी झड़प पर राजनीति तेज हो गई है। विपक्षी सांसदों द्वारा बैरिकेड तोड़ने और महिला पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की करने के आरोपों के बीच सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने अपनी और शीर्ष नेतृत्व की ओर से स्थिति स्पष्ट की है। इमरान मसूद ने पुलिस द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार और दुर्भावनापूर्ण करार देते हुए कहा कि कांग्रेस नेता किसी के साथ अभद्रता नहीं कर रहे थे, बल्कि वे केवल अपनी महिला कार्यकर्ताओं को पुलिस की बर्बरता और घसीटे जाने से बचा रहे थे।
दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर विपक्षी नेताओं के विरोध प्रदर्शन के दौरान उस समय स्थिति हिंसक हो गई थी जब पुलिस प्रशासन ने सांसदों को निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर बढ़ने से रोक दिया। इसके उपरांत दिल्ली पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने, लोक सेवकों पर हमला करने और BNSS की निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के आरोप में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और इमरान मसूद सहित अनेक नेताओं के विरुद्ध दिल्ली के पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।
इमरान मसूद ने मीडिया से बातचीत करते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस निष्पक्ष तरीके से काम करने के बजाय केंद्र में सत्तारूढ़ दल की कठपुतली बनकर व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज करा रहे सांसदों और महिला कार्यकर्ताओं पर पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। जब पुलिस बल महिला कार्यकर्ताओं को जबरन घसीटकर बसों में लाद रहा था, तब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और सांसदों ने केवल एक ढाल के रूप में खड़े होकर अपने कार्यकर्ताओं का संरक्षण किया, जिसे पुलिस धक्का-मुक्की का रूप दे रही है।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के विरुद्ध दर्ज कराई गई एफआईआर पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इमरान मसूद ने कहा कि यह सरकार की घबराहट और बौखलाहट का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने कहा कि जब भी विपक्ष जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों—जैसे वोट चोरी और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता—पर सवाल उठाता है, तो सरकार तंत्र का दुरुपयोग कर मुकदमों के माध्यम से आवाज दबाने का प्रयास करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राथमिकी दर्ज होने से न तो राहुल गांधी डरने वाले हैं और न ही कांग्रेस का कोई कार्यकर्ता पीछे हटेगा।
इमरान मसूद ने आगे कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और जनहित के विषयों पर आवाज उठाने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। उन्होंने मांग की कि पुलिस प्रशासन को अपने रवैये में सुधार लाना चाहिए और महिला कार्यकर्ताओं एवं निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ की गई बर्बरता के लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त त्यागपत्र नहीं दे देते और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक उनका यह लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।