जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती जिले पुंछ में नियंत्रण रेखा (LoC) के समीप बारूदी सुरंग (लैंडमाइन) विस्फोट होने और दो भारतीय सैन्य कर्मियों के गंभीर रूप से घायल होने की सोशल मीडिया तथा कतिपय मीडिया माध्यमों पर प्रसारित खबरों को भारतीय सेना एवं स्थानीय प्रशासन ने पूरी तरह असत्य और भ्रामक करार दिया है। सेना के रक्षा प्रवक्ता ने आधिकारिक वक्तव्य जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि पुंछ क्षेत्र में ऐसी कोई अप्रिय घटना घटित नहीं हुई है और क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति पूरी तरह सामान्य एवं नियंत्रण में है।
इससे पूर्व प्रसारित अपुष्ट खबरों में दावा किया जा रहा था कि पुंछ जिले में सीमा पार से घुसपैठ रोकने हेतु बिछाई गई एक पुरानी लैंडमाइन को डिफ्यूज करते समय अचानक विस्फोट हो गया था। इन भ्रामक रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि घटना में बम निरोधक दस्ते (BDS) के दो जवान घायल हो गए थे, जिन्हें उपचार हेतु सैन्य चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। सेना के त्वरित एवं स्पष्ट खंडन के उपरांत इन सभी अटकलों पर पूर्ण विराम लग गया है।
सेना के आधिकारिक प्रेस वक्तव्य में सुरक्षा संवेदनशील मुद्दों पर बिना किसी सत्यापन के खबरें प्रसारित करने पर चिंता व्यक्त की गई है। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा अभियानों और घटनाओं से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों के संबंध में मीडिया को अत्यंत जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए। बिना प्रामाणिक स्रोतों से पुष्टि किए ऐसी खबरें जारी करने से न केवल आम जनमानस में अकारण भय का माहौल निर्मित होता है, अपितु यह राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अनुचित है।
सैन्य सूत्रों के अनुसार, पुंछ और मेंढर जैसे अग्रिम क्षेत्रों में नियंत्रण रेखा पर आतंकवाद रोधी तंत्र पूरी तरह सतर्क और मुस्तैद है। सेना का बम निरोधक दस्ता समय-समय पर सुरक्षा प्रोटोकॉल के अंतर्गत जंग लगे पुराने विस्फोटकों एवं बारूदी सुरंगों को नियंत्रित विस्फोट (Controlled Explosion) के माध्यम से निष्प्रभावी करने का कार्य करता रहता है। इस प्रकार की नियमित प्रक्रियाओं को किसी दुर्घटना या आपात स्थिति के रूप में प्रस्तुत किया जाना तथ्यात्मक रूप से अनुचित है।
वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती जिलों में शांति व्यवस्था सुदृढ़ बनी हुई है। सेना ने नागरिकों और मीडिया संस्थानों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अनाधिकृत स्रोतों पर प्रसारित होने वाली अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल रक्षा मंत्रालय तथा प्राधिकृत सैन्य जनसंपर्क अधिकारियों (PRO Defense) द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्तियों पर ही विश्वास करें।