उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) के मुद्दे को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां और जुबानी जंग बेहद तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के तीखे हमले के पश्चात अब आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर करारा राजनीतिक तंज कसा है। चंद्रशेखर आजाद ने अखिलेश यादव के बहुचर्चित ‘पीडीए’ (PDA) वाले नारे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का पीडीए अवसरवादिता के अनुसार बदलता रहता है और वास्तव में उनका पीडीए तो स्वयं ‘पीड़ित’ है।
संवाददाताओं से वार्ता करते हुए नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि कह लेने दो भाई पीडीए, किंतु यह भी सत्य है कि उनके वाला पीडीए वास्तव में पीड़ित है। उन्होंने समाजवादी पार्टी की राजनीतिक मंशा पर प्रश्न खड़ा करते हुए कहा कि चुनाव आते ही सपा को पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों की याद आने लगती है, किंतु जब धरातल पर अधिकारों और हिस्सेदारी की बात आती है तो यह वर्ग खुद को उपेक्षित और पीड़ित महसूस करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा का पीडीए सिद्धांत स्थायी नहीं है, अपितु राजनीतिक लाभ के अनुसार इसका स्वरूप बदलता रहता है।
चंद्रशेखर आजाद से पूर्व बसपा सुप्रीमों मायावती ने भी अखिलेश यादव के पीडीए नारे को एक ढोंग और छलावा करार दिया था। मायावती ने सोशल मीडिया पर शृंखलाबद्ध वक्तव्य जारी करते हुए कहा था कि सपा की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। उन्होंने आरोप लगाया था कि अपने शासनकाल के दौरान समाजवादी पार्टी ने दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्गों के कल्याण के बजाय केवल अपने राजनीतिक हितों को साधने का कार्य किया। बसपा अध्यक्ष के बाद अब चंद्रशेखर आजाद के इस हमले से यूपी की राजनीति में बहुकोणीय द्वंद्व छिड़ गया है।
उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक समीकरणों और उप-चुनावों की आहट के बीच दलित और पिछड़े वोट बैंक पर अपना एकाधिकार स्थापित करने के लिए सभी प्रमुख दलों के मध्य होड़ मच गई है। समाजवादी पार्टी जहां लोकसभा चुनाव में मिली सफलता के आधार पर पीडीए के फॉर्मूले को और अधिक धार देने का प्रयास कर रही है, वहीं बसपा और आजाद समाज पार्टी सपा के इस मुख्य गढ़ में सेंध लगाने के लिए उस पर लगातार हमलावर हैं। चंद्रशेखर का यह बयान उस समय आया है जब वे स्वयं यूपी के वंचित वर्गों के मध्य अपनी पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।
विपक्षी दलों के इन तीखे हमलों पर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ताओं और नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि सपा का पीडीए नारा कोई राजनीतिक पैंतरा नहीं, बल्कि शोषितों और वंचितों को उनका हक दिलाने का एक सामाजिक आंदोलन है। सपा नेताओं का तर्क है कि भाजपा की जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध अगर कोई पार्टी मजबूती से लड़ रही है, तो वह केवल समाजवादी पार्टी ही है। हालांकि, मायावती और चंद्रशेखर आजाद के एक के बाद एक तीखे बयानों ने यूपी के दलित-पिछड़े राजनीति के समीकरणों को और अधिक रोचक एवं पेचीदा बना दिया है।