मध्य पूर्व में ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव और अनिश्चितता के बीच तैनात अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोत ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ (USS Abraham Lincoln) से एक अत्यंत चिंताजनक खबर सामने आई है। नौसेना द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस युद्धपोत स्ट्राइक ग्रुप में तैनात कम से कम आठ अमेरिकी नौसैनिकों ने मानसिक तनाव के चलते आत्महत्या का प्रयास किया है। अमेरिकी नौसेना के कार्यवाहक सचिव हंग काओ द्वारा अमेरिकी सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड को लिखे गए पत्र के माध्यम से इस बात की पुष्टि की गई है, जिससे अमेरिकी सेना और पेंटागन में खलबली मच गई है।
नौसेना कार्यवाहक सचिव हंग काओ के पत्र के अनुसार, यह सभी घटनाएं यूएसएस अब्राहम लिंकन स्ट्राइक ग्रुप की लंबी और चुनौतीपूर्ण तैनाती के दौरान घटित हुईं। यद्यपि राहत की बात यह रही कि समय पर चिकित्सा सहायता और अन्य सैनिकों की तत्परता के कारण किसी भी नौसैनिक की मृत्यु नहीं हुई। पत्र में उल्लेख किया गया है कि अगस्त माह में एक सैनिक समुद्र में कूद गया था, जिसे तत्काल खोज और बचाव दल द्वारा सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि मार्च माह में एक अन्य सैनिक को उसके साथियों ने समुद्र में छलांग लगाने से पूर्व ही बचा लिया था।
ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष के चलते यह युद्धपोत लगभग 300 दिनों से अधिक समय से समुद्र में तैनात था, जिसमें से 250 से अधिक दिन बिना किसी बंदरगाह (पोर्ट विजिट) पर रुके बिना लगातार जलक्षेत्र में बीते हैं। लंबे समय तक परिवार से दूर रहने, युद्ध का निरंतर दबाव, दैनिक उपयोग के साधनों में आई कमी और भीषण मानसिक तनाव को इस स्थिति का मुख्य कारण माना जा रहा है। इस पोत पर लगभग 6,000 से 7,000 सैनिक तैनात हैं, और इतनी बड़ी संख्या में आत्महत्या के प्रयासों का सामने आना सैन्य नेतृत्व की परिचालन रणनीति और सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
इस खुलासे के पश्चात अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) और नौसेना में हड़कंप मच गया है तथा सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) की समीक्षा करने की मांग तीव्र हो गई है। यद्यपि नौसेना प्रशासन का कहना है कि पोत पर पादरी, मनोचिकित्सक और परामर्शदाता तैनात थे, किंतु इसके बावजूद सैनिकों में अवसाद और हताशा का स्तर अत्यंत उच्च देखा गया। वर्तमान में यूएसएस अब्राहम लिंकन को उस क्षेत्र से हटाकर स्वदेश वापसी के लिए रवाना कर दिया गया है, परंतु इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी सैन्य बल के अंतर्निहित संकट को उजागर कर दिया है।