धूम्रपान और शराब का सेवन अक्सर सामाजिक मेल-जोल और पार्टियों का हिस्सा माना जाता है, लेकिन लंबे समय तक इनका नियमित सेवन शरीर के साथ-साथ दिमाग को भी प्रभावित कर सकता है। फेफड़ों और लिवर पर इनके नुकसान की चर्चा आम है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक धूम्रपान और अधिक शराब का सेवन मस्तिष्क की रक्त आपूर्ति, उसकी संरचना और सोचने-समझने की क्षमता पर भी असर डाल सकता है। जालंधर के फोर्टिस अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अनमोल सिंह राय ने बताया कि दिमाग में होने वाले कुछ बदलाव स्पष्ट लक्षण, जैसे याददाश्त कमजोर होना या सोचने की गति धीमी पड़ना, दिखाई देने से पहले भी शुरू हो सकते हैं।
धूम्रपान का दिमाग पर असर मुख्य रूप से रक्त वाहिकाओं और ऑक्सीजन की आपूर्ति से जुड़ा है। निकोटीन रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है, जिससे दिमाग तक ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। लंबे समय तक तंबाकू के धुएं में मौजूद रसायन रक्त वाहिकाओं की दीवारों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और उन्हें अधिक कठोर बना सकते हैं। वहीं सिगरेट के धुएं में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड शरीर और मस्तिष्क के ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुंचने की प्रक्रिया को और प्रभावित कर सकती है।
धूम्रपान और डिमेंशिया के बीच संबंध को लेकर उपलब्ध शोध भी चिंता की वजह बताता है। अल्जाइमर डिजीज इंटरनेशनल के अनुसार, धूम्रपान डिमेंशिया के जोखिम से जुड़े परिवर्तनीय कारकों में शामिल है। संगठन का कहना है कि धूम्रपान से बचना और अत्यधिक शराब के सेवन को कम करना मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति में डिमेंशिया का विकास केवल एक ही कारण से तय नहीं होता और उम्र, रक्तचाप, शारीरिक सक्रियता तथा अन्य स्वास्थ्य कारक भी भूमिका निभाते हैं।
शराब दिमाग की संरचना को कैसे प्रभावित करती है?
शराब का असर धूम्रपान से अलग तरीके से दिमाग तक पहुंचता है। शराब सीधे मस्तिष्क के ऊतकों और उनकी कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है। दिमाग में ग्रे मैटर मुख्य रूप से सोचने, याद रखने और अन्य जटिल कार्यों से जुड़ा होता है, जबकि व्हाइट मैटर मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्सों के बीच संकेतों के संचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
2022 में नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में यूके बायोबैंक के 36,678 मध्यम आयु और बुजुर्ग प्रतिभागियों के ब्रेन स्कैन और शराब सेवन के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में शराब के सेवन और मस्तिष्क के कुल ग्रे मैटर तथा व्हाइट मैटर की मात्रा के बीच नकारात्मक संबंध पाया गया। शोधकर्ताओं ने बताया कि औसतन प्रतिदिन एक से दो अल्कोहल यूनिट लेने वाले लोगों में भी ऐसे संबंध दिखाई दे रहे थे और सेवन बढ़ने के साथ ये संबंध अधिक मजबूत होते गए।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि शराब की मात्रा बढ़ने के साथ मस्तिष्क के कई हिस्सों में ग्रे मैटर की मात्रा और व्हाइट मैटर की संरचना से जुड़े मापदंडों में बदलाव अधिक स्पष्ट होते गए। हालांकि यह अध्ययन अवलोकनात्मक था, इसलिए इसके आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि शराब ही इन सभी बदलावों का प्रत्यक्ष कारण है। शोधकर्ताओं ने खुद यह भी बताया कि ऐसे अध्ययन में अन्य कारकों और संभावित रिवर्स कॉजेशन की पूरी तरह संभावना खत्म नहीं की जा सकती।
जब धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन एक साथ लंबे समय तक किया जाता है, तो दिमाग की रक्त वाहिकाओं से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। धूम्रपान रक्तचाप और रक्त वाहिकाओं में सूजन से जुड़ा है, जबकि अत्यधिक शराब सेवन भी हृदय और रक्त वाहिका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इन कारणों से मस्तिष्क की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने और संवहनी डिमेंशिया जैसे रोगों से जुड़े जोखिमों पर असर पड़ सकता है।
हालांकि नुकसान का मतलब यह नहीं है कि धूम्रपान या शराब छोड़ने के बाद दिमाग में कोई सुधार संभव नहीं है। धूम्रपान छोड़ना और शराब का सेवन कम करना समग्र हृदय तथा मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद कदम माने जाते हैं। अल्जाइमर डिजीज इंटरनेशनल के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, सामाजिक रूप से सक्रिय रहना और धूम्रपान से बचना डिमेंशिया के जोखिम को कम करने में मदद करने वाले उपायों में शामिल हैं।
मस्तिष्क की सेहत के लिए विशेषज्ञ नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और संतुलित भोजन पर भी जोर देते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, मेवे और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ आहार का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। साथ ही रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल जैसे स्वास्थ्य कारकों को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि हृदय और रक्त वाहिकाओं की सेहत का मस्तिष्क के स्वास्थ्य से सीधा संबंध है।
अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से शराब या तंबाकू का सेवन करने की आदत है और वह इसे कम करना या छोड़ना चाहता है, तो डॉक्टर या विशेषज्ञ की मदद लेना उपयोगी हो सकता है। खासकर लंबे समय से अधिक शराब का सेवन करने वाले व्यक्ति को अचानक शराब बंद करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि कुछ लोगों में अचानक बंद करने पर गंभीर विदड्रॉल लक्षण हो सकते हैं। यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है; किसी व्यक्ति की स्थिति के अनुसार उपचार या सलाह के लिए डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।