अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट यानी ICC के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका पूरे इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट पर व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है। यह कदम इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ ICC की ओर से जारी गिरफ्तारी वारंट तथा अमेरिका से जुड़े मामलों की जांच को लेकर वॉशिंगटन और हेग स्थित अदालत के बीच बढ़ते विवाद के बीच सामने आया है। हालांकि, 21 सितंबर 2026 तक इन नए व्यापक प्रतिबंधों की अंतिम घोषणा नहीं हुई है।
रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने ICC को निशाना बनाने वाले प्रतिबंधों की तैयारी कर ली है और इनकी घोषणा जल्द की जा सकती है। मामले से परिचित दो सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतिबंधों का दायरा केवल अदालत के अधिकारियों तक सीमित रहने के बजाय पूरे संस्थान तक बढ़ाया जा सकता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला संयुक्त राष्ट्र महासभा की मौजूदा बैठक के दौरान या उसके आसपास अंतिम रूप ले सकता है, हालांकि घोषणा का सटीक समय अभी तय नहीं बताया गया है।
ICC पर किस तरह के प्रतिबंध लगाने की तैयारी?
प्रस्तावित प्रतिबंध लागू होने की स्थिति में अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों के लिए ICC के साथ वित्तीय लेनदेन, सेवाओं और अन्य कारोबारी गतिविधियों पर व्यापक पाबंदियां लग सकती हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ गतिविधियों के लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय यानी OFAC से विशेष लाइसेंस की जरूरत पड़ सकती है। इसका असर अदालत की वित्तीय व्यवस्था, आईटी सेवाओं, बीमा, जांच से जुड़ी सेवाओं और रोजमर्रा के भुगतान पर पड़ने की आशंका जताई गई है।
अमेरिकी प्रशासन पहले ही ICC के कई अधिकारियों के खिलाफ प्रतिबंध लगा चुका है। अगस्त 2026 में ICC की अध्यक्ष टोमोको अकाने और वरिष्ठ ट्रायल वकील अब्दुलाये सेये को भी अमेरिकी प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया था, जिन पर लगाए गए प्रतिबंध 17 सितंबर से प्रभावी हुए। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक, ICC से जुड़े प्रतिबंधों के लिए ट्रंप प्रशासन ने 6 फरवरी 2025 के कार्यकारी आदेश समेत कई कानूनी प्राधिकारों का इस्तेमाल किया है।
अमेरिका लंबे समय से ICC का सदस्य नहीं है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अदालत ने ऐसे देशों के नागरिकों और अधिकारियों के खिलाफ अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल किया है जो रोम संविधि के पक्षकार नहीं हैं। फरवरी 2025 में ट्रंप ने ICC पर कार्रवाई के लिए कार्यकारी आदेश जारी किया था। उस आदेश में नेतन्याहू और गैलेंट के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट को अमेरिकी प्रशासन ने अनुचित बताया था और ICC से जुड़े कुछ लोगों की संपत्ति को ब्लॉक करने तथा अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया था।
नेतन्याहू और गैलेंट के खिलाफ ICC ने नवंबर 2024 में गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। अदालत के अनुसार, ये वारंट गाजा युद्ध के दौरान कथित युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़े आरोपों पर आधारित थे। इजरायल ने ICC के अधिकार क्षेत्र और आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। अमेरिका और इजरायल दोनों रोम संविधि के पक्षकार नहीं हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जुलाई 2026 में ICC को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के लिए अभियान शुरू करने की घोषणा की थी और दूसरे देशों से भी अदालत से दूरी बनाने की अपील की थी। इसके बाद वॉशिंगटन की कार्रवाई व्यक्तिगत अधिकारियों पर प्रतिबंध से आगे बढ़कर पूरे संस्थान को प्रभावित करने की दिशा में जाती दिखाई दे रही है।
ICC की ओर से अमेरिका की कार्रवाई पर चिंता जताई गई है। अदालत और उसके समर्थकों का कहना है कि न्यायिक संस्थान पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव उसकी स्वतंत्रता तथा अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि ICC को उन देशों के अधिकारियों पर अधिकार क्षेत्र नहीं जताना चाहिए जिन्होंने अदालत की संधि को स्वीकार नहीं किया है। यह विवाद ICC के अधिकार क्षेत्र, राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही के बीच लंबे समय से चल रही बहस का हिस्सा है।
यदि ट्रंप प्रशासन पूरे ICC पर प्रतिबंध लागू करता है, तो यह 2025 से शुरू हुई अमेरिकी कार्रवाई का अगला बड़ा चरण होगा। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रतिबंधों की तैयारी की रिपोर्ट सामने आई है, लेकिन अंतिम आदेश और उसके वास्तविक दायरे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि अमेरिका केवल कुछ संस्थागत गतिविधियों को प्रतिबंधित करता है या अदालत के साथ अमेरिकी वित्तीय और सेवा संबंधों पर व्यापक रोक लगाता है।