अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के मुताबिक, रूस ने नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले एक बार फिर गुप्त ऑनलाइन प्रभाव अभियान शुरू किया है। इस अभियान का कथित उद्देश्य सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए अमेरिकी मतदाताओं के बीच चुनावी प्रक्रिया को लेकर अविश्वास पैदा करना और राजनीतिक विभाजन को बढ़ाना है। अमेरिकी अधिकारियों ने यह जानकारी न्यूयॉर्क टाइम्स को दी है।
क्या है रूस पर लगाया गया आरोप?
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में तैयार की गई खुफिया रिपोर्टों में पाया गया है कि रूसी सरकार ने चुनाव से जुड़े मुद्दों पर डिजिटल प्रभाव अभियान को मंजूरी दी है। इसके तहत सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री फैलाने या बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है, जिससे अमेरिकी समाज में मौजूद राजनीतिक मतभेद और गहरे हों।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस अभियान का एक प्रमुख लक्ष्य नवंबर के मध्यावधि चुनावों की विश्वसनीयता को लेकर लोगों का भरोसा कमजोर करना बताया गया है। हालांकि, अधिकारियों ने यह नहीं कहा कि रूस अमेरिकी वोटिंग मशीनों या मतदान प्रणाली को तकनीकी रूप से प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
वोटिंग मशीनों पर हमले का सबूत नहीं
अमेरिकी खुफिया आकलन में फिलहाल ऐसा कोई सबूत सामने नहीं आया है कि रूस मतदान मशीनों या वोटों की वास्तविक गिनती को प्रभावित करने के लिए तकनीकी हमला कर रहा है। यानी आरोप मुख्य रूप से सूचना और जनमत को प्रभावित करने वाले ऑनलाइन अभियानों से जुड़ा है, न कि मतदान प्रक्रिया में सीधे छेड़छाड़ से।
यह अंतर महत्वपूर्ण है क्योंकि विदेशी प्रभाव अभियान का उद्देश्य लोगों की धारणा और राजनीतिक बहस को प्रभावित करना हो सकता है, जबकि मतदान प्रणाली में तकनीकी हस्तक्षेप अलग तरह का खतरा होता है।
एआई से बने फर्जी वीडियो भी चिंता का विषय
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी चुनावों से जुड़े कुछ ऐसे सोशल मीडिया अभियान हाल के हफ्तों में सामने आए हैं, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से फर्जी वीडियो तैयार किए गए। इन वीडियो में हॉलीवुड की मशहूर हस्तियों को प्रमुख सीनेट चुनावों से जुड़े मुद्दों पर बोलते हुए दिखाया गया।
विशेषज्ञों ने ऐसे अभियानों को रूसी दुष्प्रचार नेटवर्क से जोड़ा है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार मौजूदा अभियान रूस के पिछले कुछ चुनावी अभियानों की तुलना में कम व्यापक या कम समन्वित दिखाई देता है।
रूस का मकसद किसी एक पार्टी को फायदा पहुंचाना?
अमेरिकी अधिकारियों के कुछ आकलनों के अनुसार, रूस के मौजूदा अभियान का मुख्य उद्देश्य किसी एक राजनीतिक दल को सीधे फायदा पहुंचाने के बजाय अमेरिकी राजनीति में अराजकता और अविश्वास बढ़ाना हो सकता है।
हालांकि, स्वतंत्र दुष्प्रचार शोधकर्ताओं ने हाल के कुछ ऐसे अभियानों की पहचान की है, जिन्हें उन्होंने रूस से जोड़ा और जिनमें स्विंग राज्यों के डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। यह एक शोधकर्ताओं का आकलन है और इसे अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं पेश किया गया है।
अमेरिकी चुनावों में रूसी प्रभाव का पुराना इतिहास
अमेरिकी खुफिया आकलनों के अनुसार, 2016 के बाद से रूस ने अमेरिका के प्रत्येक संघीय चुनाव चक्र में ऑनलाइन प्रभाव अभियानों के जरिए अमेरिकी राजनीतिक बहस को प्रभावित करने की कोशिश की है। 2024 के चुनाव के दौरान भी अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने रूस समेत विदेशी शक्तियों की ओर से अमेरिकी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर करने वाले प्रयासों की जानकारी दी थी।
2026 के मध्यावधि चुनावों को लेकर भी अमेरिकी चुनाव अधिकारी साइबर खतरों और गलत सूचनाओं से निपटने की तैयारियां कर रहे हैं। चुनाव अधिकारियों के सामने सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार की गई भ्रामक सामग्री की चुनौती भी बनी हुई है।
रूस ने आरोपों पर क्या कहा?
रूस ने अतीत में अमेरिकी चुनावों में दखल देने के अमेरिकी आरोपों से इनकार किया है। मौजूदा रिपोर्टों के संदर्भ में भी अमेरिकी अधिकारियों द्वारा बताए गए खुफिया आकलन सार्वजनिक रूप से पूरी तरह जारी नहीं किए गए हैं। इसलिए अभियान के पूरे स्वरूप और उसके पीछे की संरचना से जुड़ी कई जानकारियां अभी सार्वजनिक नहीं हैं।
अमेरिका में नवंबर के मध्यावधि चुनावों के करीब आने के साथ विदेशी ऑनलाइन प्रभाव अभियानों पर निगरानी बढ़ने की संभावना है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से अमेरिकी अधिकारियों के खुफिया आकलनों और स्वतंत्र शोधकर्ताओं द्वारा पहचाने गए ऑनलाइन अभियानों पर आधारित है।