पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद में चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों गुटों को नए नाम और प्रतीक आवंटित किए हैं। आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ चुनाव चिन्ह दिया, जबकि बागी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है।
CJP नेता सौरव दास ने कसा तंज
चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद कॉकरेच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास ने सोशल मीडिया पर बागी गुट को मिले ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह को लेकर तंज कसा। उन्होंने लिखा कि TMC छोड़ने वालों के लिए ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह है और सवाल किया, “लिफाफे में भरकर क्या आया था?” इसके बाद उन्होंने टिप्पणी की कि इस देश में मजाक अपने आप बन जाते हैं। यह सौरव दास की राजनीतिक टिप्पणी है।
चुनाव आयोग ने क्यों बदले नाम और चिन्ह?
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी करते हुए दोनों गुटों को आगामी उपचुनावों में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पारंपरिक ‘दो फूल और घास’ वाले चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने से रोक दिया था। आयोग के मुताबिक दोनों पक्ष पार्टी के नाम और संगठन पर अपना दावा कर रहे हैं, इसलिए अंतिम फैसला होने तक अलग पहचान देना जरूरी था।
इसके बाद दोनों गुटों से नए नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प मांगे गए। 18 सितंबर को आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के लिए ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और ‘फुटबॉल प्लेयर’ चिन्ह को मंजूरी दी। वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह दिया गया।
दोनों गुटों के बीच क्या है विवाद?
यह विवाद TMC के संगठन और पार्टी की पहचान पर दोनों पक्षों के दावे से जुड़ा है। चुनाव आयोग ने फिलहाल यह तय नहीं किया है कि मूल पार्टी के नाम और पुराने चुनाव चिन्ह पर अंतिम अधिकार किस गुट का होगा। आयोग की मौजूदा व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम है और अंतिम निर्णय बाद में किया जाना है।
किन सीटों पर लागू होगी नई व्यवस्था?
चुनाव आयोग की यह व्यवस्था पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों के लिए लागू होगी। आयोग ने दोनों गुटों के उम्मीदवारों की ओर से पहले दाखिल नामांकन को नई पार्टी पहचान और चुनाव चिन्ह के साथ जोड़ने की व्यवस्था भी की है। उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने हैं और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।
ममता बनर्जी ने फैसले पर जताई आपत्ति
चुनाव आयोग के फैसले पर ममता बनर्जी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आयोग की कार्रवाई को असंवैधानिक और राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया। यह ममता बनर्जी का आरोप है, जबकि चुनाव आयोग की ओर से जारी आदेश में अंतरिम व्यवस्था का उद्देश्य दोनों गुटों के उम्मीदवारों के नामांकन और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाना बताया गया है।