मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के त्यागपत्र तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विपक्षी दलों द्वारा किए जा रहे उग्र आंदोलनों के बीच एक बड़ा कानूनी व राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के समक्ष आधिकारिक रूप से आरोप लगाया है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर आयोजित प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा कर्तव्य पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता, धक्का-मुक्की और छेड़छाड़ (Molestation) की गई है। सरकार ने शीर्ष अदालत में दिल्ली पुलिस द्वारा लागू किए गए कड़े सुरक्षा घेरे, यातायात प्रतिबंधों और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती का बचाव करते हुए यह बात कही।
जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दलों के महाप्रदर्शन से पूर्व दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों के द्वार बंद करने तथा व्यापक बैरिकेडिंग के विरुद्ध दायर अर्जी पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने सुरक्षात्मक कदमों को अनिवार्य बताया। सरकार ने अदालत को सूचित किया कि बीते दिनों हुए प्रदर्शनों में भीड़ ने हिंसक रुख अपनाते हुए महिला पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया, जिसमें कई महिला कर्मी चोटिल भी हुईं।
कड़े सुरक्षा प्रबंधों और प्रतिबंधों का सरकार ने किया कड़ा बचाव
शीर्ष अदालत में न्यायमूर्ति की पीठ के समक्ष दलील देते हुए केंद्र सरकार के विधि अधिकारियों ने कहा कि नई दिल्ली क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब प्रदर्शनों के नाम पर सुरक्षा बलों पर हमले किए जा रहे हों और सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाई जा रही हो, तो एहतियाती तौर पर धारा 163 (पूर्ववर्ती धारा 144) लागू करना और मेट्रो परिचालन में अस्थायी नियमन आवश्यक हो जाता है, ताकि अराजकता की स्थिति को फैलने से रोका जा सके।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: ‘सुरक्षा सर्वोपरि, किंतु सामान्य जनजीवन न हो प्रभावित’
मामले की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने सुरक्षा प्रबंधों की आवश्यकता को स्वीकार किया, किंतु साथ ही प्रशासन को कड़ी चेतावनी भी दी। अदालत ने मौखिक प्रेक्षण में कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को भीड़ नियंत्रण और नागरिक सुविधाओं के मध्य संतुलन बनाना चाहिए। पीठ ने कहा कि सुरक्षा कारणों का हवाला देकर पूरी दिल्ली के यातायात या सार्वजनिक परिवहन (मेट्रो व्यवस्था) को इस तरह ठप नहीं किया जा सकता कि सामान्य नागरिकों और यात्रियों का दैनिक जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाए।
कांग्रेस और विपक्ष का तीखा पलटवार: ‘आंदोलन को बदनाम करने का षड्यंत्र’
केंद्र सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में लगाए गए इन आरोपों पर कांग्रेस पार्टी और विपक्षी सहयोगियों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने सरकार के आरोपों को पूर्णतः मनगढ़ंत, झूठा और मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला षड्यंत्र करार दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब-जब जनता का आक्रोश सड़कों पर दिखता है, तब-तब केंद्र सरकार पुलिस प्रशासन का ढाल के रूप में उपयोग कर विपक्ष को बदनाम करने का प्रयास करती है। उन्होंने दोहराया कि वे पुलिस की प्राथमिकियों या ऐसे आरोपों से पीछे हटने वाले नहीं हैं तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक उनका संवैधानिक संघर्ष जारी रहेगा।