प्रसिद्ध बांग्लादेशी लेखिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव, जिहादी समूहों के प्रभाव और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर वहां की वर्तमान सरकार पर सीधा प्रहार किया है। कोलकाता आगमन पर पत्रकारों से संवाद करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश की सरकार के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष संरक्षण के कारण ही देश में कट्टरपंथी और उग्रवादी ताकतों का दबदबा निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि पड़ोसी देश को एक स्वस्थ और सभ्य समाज के रूप में जीवित रखना है, तो इन जिहादी तत्वों को जड़ से समाप्त करना अनिवार्य है।
कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत के दौरान तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश में आगामी दुर्गा पूजा उत्सवों के विरोध में निकाले जा रहे जुलूसों और मंदिरों तथा देवी-प्रतिमाओं में की जा रही तोड़फोड़ की घटनाओं पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी ताकतें खुलेआम अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता का दमन कर रही हैं और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। उन्होंने सभी धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील नागरिकों से इन सांप्रदायिक शक्तियों के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया।
तसलीमा नसरीन ने रेखांकित किया कि बांग्लादेश में शिक्षा प्रणाली, विशेष रूप से मदरसों में कट्टरपंथी विचारधारा का प्रसार किया जा रहा है, जिससे युवाओं को हिंसा के मार्ग पर धकेला जा रहा है। उन्होंने शरिया कानून और जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों के बढ़ते प्रभाव को देश के लोकतंत्र एवं महिलाओं के अधिकारों के लिए अत्यंत घातक बताया। उनके अनुसार, यदि उग्रवादी समूहों के विरुद्ध तत्काल कठोर विधिक कार्रवाई नहीं की गई, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी और देश में अल्पसंख्यकों का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।
19 वर्षों के लंबे अंतराल के उपरांत जुलाई में पहली बार और अब पुनः अक्टूबर में दूसरी बार कोलकाता पहुंचीं तसलीमा नसरीन ने पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक आवहवा की सराहना की। उन्होंने कहा कि कोलकाता में दुर्गा पूजा का आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक अद्भुत कला प्रदर्शनी जैसा प्रतीत होता है, जहां भयमुक्त वातावरण में उत्सव मनाया जाता है। यद्यपि वे इस वर्ष पूरी पूजा अवधि में यहां उपस्थित नहीं रह पाएंगी, किंतु उन्होंने महालया कार्यक्रमों में भाग लेने और आगामी वर्षों में इस पावन पर्व पर कोलकाता आने की इच्छा प्रकट की।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर विचार व्यक्त करते हुए तसलीमा नसरीन ने आशा व्यक्त की कि भारत और बांग्लादेश के मध्य सकारात्मक एवं मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंध बने रहेंगे। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि पड़ोसी देश में सक्रिय भारत-विरोधी और जिहादी शक्तियों पर प्रभावी अंकुश लगाए बिना स्थायी शांति और सहयोग संभव नहीं है। उन्होंने भारत सरकार से भी आग्रह किया कि वह पड़ोसी देश में हिंदुओं एवं अन्य अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा हेतु कूटनीतिक दबाव बनाए रखे।