पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) राजबीर घुम्मन और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से जुड़े अधिकारियों पर लगे कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई (CBI) जांच के पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध दायर याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में सुनवाई टल गई है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने पंजाब सरकार की ओर से दाखिल विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने सीबीआई द्वारा की जाने वाली किसी भी संभावित या कठोर कार्रवाई पर तत्काल अंतरिम रोक (Interim Stay) लगाने से स्पष्ट इंकार कर दिया है।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए राज्य के सीएमओ से जुड़े अधिकारियों पर ट्रांसफर-पोस्टिंग, टेंडर आवंटन और सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) में अवैध वित्तीय लेनदेन के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपने का ऐतिहासिक आदेश दिया था। उच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच एजेंसी को एफआईआर (FIR) दर्ज कर दो माह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार ने इसी आदेश को निरस्त करने हेतु शीर्ष अदालत का रुख किया है।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने पीठ के समक्ष तर्क दिया कि राज्य में निकट भविष्य में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे समय में केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके राज्य सरकार की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि राज्य सरकार ने वर्ष 2020 में ही सीबीआई को राज्य में जांच करने के लिए दी गई सामान्य सहमति (General Consent) वापस ले ली थी, अतः राज्य की सहमति के बिना जांच का जिम्मा सीबीआई को देना संवैधानिक ढांचे के विपरीत है।
दूसरी ओर, पीठ ने मामले की तात्कालिकता और अंतरिम राहत की मांग पर विचार करते हुए जांच की प्रक्रिया में तुरंत हस्तक्षेप करने से परहेज किया। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उच्च न्यायालय को सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार, राज्य में प्रशासनिक पदों के स्थानांतरण और भूमि उपयोग परिवर्तन की फाइलों को मंजूरी देने के बदले करोड़ों रुपये के अनधिकृत लेनदेन के प्राथमिक साक्ष्य मिले हैं। उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि राज्य पुलिस की निष्पक्षता पर संदेह के कारण ही निष्पक्ष जांच हेतु सीबीआई को कमान सौंपी गई है।
शुक्रवार को होने वाली आगामी सुनवाई पंजाब की राजनीति और भगवंत मान सरकार के लिए अत्यंत निर्णायक मानी जा रही है। यदि सर्वोच्च न्यायालय उच्च न्यायालय के निर्णय को बरकरार रखता है, तो सीबीआई मुख्यमंत्री कार्यालय के शीर्ष अधिकारियों और ओएसडी से पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। वहीं, आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास रखते हैं और सुनवाई के दौरान अपने सभी विधिक तथ्य मजबूती से प्रस्तुत करेंगे।